डिजिटल कृषि विपणन के क्षेत्र में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी पहल इलेक्ट्रॉनिक राष्ट्रीय कृषि बाजार यानी ई-नाम अब व्यापक आधार हासिल कर चुकी है। संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, प्लेटफॉर्म पर 1.79 करोड़ से अधिक किसान पंजीकृत हो चुके हैं और 23 राज्यों तथा चार केंद्रशासित प्रदेशों की 1,522 मंडियां इससे जुड़ चुकी हैं।
कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने लोकसभा में लिखित उत्तर में बताया कि छोटे और सीमांत किसानों तक इसकी पहुंच और प्रभावशीलता की नियमित समीक्षा की जाती है। 31 जनवरी 2026 तक ई-नाम के माध्यम से व्यापार की मात्रा में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2022-23 में जहां 18.58 करोड़ टन कृषि उपज का कारोबार हुआ था, वहीं 2024-25 में यह बढ़कर 20.47 करोड़ टन तक पहुंच गया।
ई-नाम प्लेटफॉर्म किसानों को ऑनलाइन व्यापार, गुणवत्ता परीक्षण, ग्रेडिंग, पैकेजिंग और डिजिटल भुगतान जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराता है। किसान 100 किलोमीटर के दायरे में स्थित मंडियों के भाव और मांग की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं तथा बिक्री की राशि सीधे अपने बैंक खातों में प्राप्त कर सकते हैं।
राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और तेलंगाना जैसे राज्यों में पिछले तीन वर्षों के दौरान उल्लेखनीय व्यापारिक गतिविधियां दर्ज की गई हैं। पारंपरिक थोक कृषि उपज के अलावा नारियल, बांस और नींबू जैसे संख्या-आधारित उत्पादों की 32.27 करोड़ इकाइयों का भी इस प्लेटफॉर्म के जरिए लेन-देन हुआ है।
सरकार का कहना है कि ई-नाम का मूल उद्देश्य मंडियों के डिजिटल एकीकरण के माध्यम से एकीकृत राष्ट्रीय कृषि बाजार का निर्माण करना, पारदर्शिता बढ़ाना और किसानों को देशव्यापी प्रतिस्पर्धी बाजारों तक सीधी पहुंच उपलब्ध कराना है। डिजिटल भुगतान और पारदर्शी मूल्य खोज प्रणाली से कृषि विपणन व्यवस्था में संरचनात्मक बदलाव के संकेत मिल रहे हैं।
यह भी पढ़े: मजबूत घरेलू और निर्यात मांग से ट्रैक्टर की बिक्री में 45 प्रतिशत उछाल..!
जागरूक रहिए व नुकसान से बचिए और अन्य लोगों के जागरूकता के लिए साझा करें एवं कृषि जागृति, स्वास्थ्य सामग्री, सरकारी योजनाएं, कृषि तकनीक, व्यवसायिक एवं जैविक खेती से संबंधित जानकारियां प्राप्त करने के लिए जुड़े कृषि जागृति चलो गांव की ओर से या कृषि संबंधित किसी भी समस्या के जैविक समाधान के लिए WhatsApp करें।