केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि देश के 19 राज्यों में अब तक 9.25 करोड़ से अधिक किसान आईडी तैयार की जा चुकी हैं। यह राष्ट्रीय डिजिटल किसान डेटाबेस के निर्माण में एक मील का पत्थर है, जो कृषि सेवाओं के आधुनिकीकरण और योजनाओं के सटीक कार्यान्वयन में मदद करेगा।
राज्य कृषि मंत्रियों के साथ हुई समीक्षा बैठक में मंत्री ने उर्वरकों की उपलब्धता पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि उर्वरकों की जमाखोरी और कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। सरकार का लक्ष्य है कि पीक सीजन के दौरान किसानों को बिना किसी बाधा के समय पर खाद और अन्य कृषि इनपुट उपलब्ध कराए जा सकें।
सरकार का मुख्य ध्यान अब बिचौलियों की भूमिका को समाप्त कर किसानों को उनकी उपज का सीधा लाभ दिलाने पर है। इसके लिए खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने और शिकायत निवारण प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाने पर जोर दिया गया है। कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों से सीधे खरीद को बढ़ावा देकर उनकी आय को सुरक्षित किया जाएगा।
खरीद में होने वाली अनियमितताओं को रोकने के लिए राज्यों को तकनीकी सुरक्षा चक्र अपनाने को कहा गया है। अब पंजीकरण को न केवल आधार से जोड़ा जाएगा, बल्कि बायोमेट्रिक या फेस ऑथेंटिकेशन भी लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, उपज की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए ‘फेयर एवरेज क्वालिटी’ मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाएगा।
कृषि क्षेत्र की क्षेत्रीय विविधताओं और समस्याओं को गहराई से समझने के लिए सरकार ने पांच अलग-अलग कृषि-जलवायु क्षेत्रों में क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन आयोजित करने की घोषणा की है। इस श्रृंखला का पहला सम्मेलन 7 अप्रैल को जयपुर में आयोजित होगा, जहाँ पश्चिमी क्षेत्र की विशिष्ट जरूरतों के अनुसार भविष्य की रणनीतियां तैयार की जाएंगी।
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