बिहार में पोल्ट्री क्षेत्र को मजबूती देने के लिए इंडियन पोल्ट्री एलायंस राज्य में करीब 300 करोड़ रुपय का निवेश करने जा रही है। इस निवेश का उद्देश्य न केवल राज्य में पोल्ट्री उत्पादन क्षमता बढ़ाना है, बल्कि पूर्वोत्तर भारत और बंगाल क्षेत्र के लिए भरोसेमंद और संगठित आपूर्ति श्रृंखला तैयार करना भी है। यह निवेश बिहार को पूर्वी भारत के पोल्ट्री हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक अहम कदम साबित हो सकता है।
ऑलाना समूह के निदेशक फौज़ान अलावी ने एक बयान में कहा कि यह परियोजना संस्थागत खरीदारों के साथ-साथ उपभोक्ता बाजार दोनों को ध्यान में रखकर विकसित की जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित निवेश के तहत बिहार में एक पूर्णतः एकीकृत पोल्ट्री कॉम्प्लेक्स स्थापित किया जाएगा, जिसमें ब्रीडर फार्म, हैचरी, फीड मिल और आधुनिक पोल्ट्री प्रोसेसिंग इकाइयाँ शामिल होंगी।
अलावी के अनुसार, इस एकीकृत मॉडल से सप्लाई चेन की दक्षता में उल्लेखनीय सुधार होगा और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी मौजूदा चुनौतियाँ काफी हद तक कम होंगी। साथ ही, उपभोक्ताओं को सुरक्षित, गुणवत्ता-आधारित और पूरी तरह ट्रेस करने योग्य पोल्ट्री उत्पादों की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि परियोजना के संचालन में बायो-सिक्योरिटी, पशु कल्याण, खाद्य सुरक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता से जुड़े सर्वोत्तम अंतरराष्ट्रीय मानकों को प्राथमिकता दी जाएगी। इस निवेश से खेती, प्रोसेसिंग, परिवहन, लॉजिस्टिक्स और अन्य सहायक सेवाओं में लगभग 1,500 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की संभावना है।
इंडियन पोल्ट्री एलायंस का यह कदम बिहार को ‘पूर्वी भारत का पोल्ट्री हब’ बनाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा। इससे न केवल प्रोटीन की कमी दूर होगी, बल्कि बिहार के ग्रामीण इलाकों में आर्थिक समृद्धि भी आएगी। अगर सरकार और प्रशासन का सहयोग इसी तरह बना रहा, तो बिहार जल्द ही औद्योगिक नक्शे पर चमकता दिखाई देगा।
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