रबी विपणन सत्र 2026 गेहूं उत्पादन को लेकर एक मिश्रित परिदृश्य पेश कर रहा है। जहां एक ओर रकबे में विस्तार और बेहतर मृदा नमी के कारण बंपर पैदावार की उम्मीद जगी है, वहीं दूसरी ओर फसल पकने के अंतिम चरणों में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने शुरुआती उत्पादन अनुमानों पर दबाव डाल दिया है।
सरकारी आंकड़ों में जहां इस वर्ष 1202 लाख टन के रिकॉर्ड गेहूं उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है, वहीं उद्योग जगत के प्रमुख संगठन ‘रोलर फ्लोर मिलर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया’ ने जमीनी परिस्थितियों का आकलन करते हुए अपने अनुमानों को संशोधित कर दिया है। फेडरेशन के अध्यक्ष नवनीत चितलंगिया के अनुसार, अब उत्पादन 1135 से 1140 लाख टन के बीच रहने का अनुमान है, जो उनके पूर्ववर्ती 1150 लाख टन के अनुमान से कम है।
हालांकि, यह संशोधित आंकड़ा पिछले साल के 1095 से 1100 लाख टन के उत्पादन स्तर से अब भी बेहतर स्थिति दर्शाता है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इस वर्ष फसल चक्र के दौरान मौसम का मिजाज काफी अस्थिर रहा है। फरवरी माह में समय से पहले बढ़ी तपिश के बाद अचानक हुई बारिश और ओलावृष्टि ने फसलों को दोहरी चुनौती दी है।
उद्योग विशेषज्ञ रमेश गर्ग का मानना है कि इस मौसमी उतार-चढ़ाव का सीधा असर गेहूं की गुणवत्ता, विशेषकर दानों की चमक और वजन पर पड़ सकता है। इससे मिलर्स और प्रसंस्करण उद्योग के लिए उच्च गुणवत्ता वाले गेहूं की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है। कुछ विशिष्ट क्षेत्रों में गुणवत्ता से जुड़े मुद्दे बाजार की कीमतों को भी प्रभावित कर सकते हैं।
इस वर्ष गेहूं का कुल रकबा बढ़कर 334 लाख हेक्टेयर तक पहुँच गया है, जो पिछले साल के 328 लाख हेक्टेयर के मुकाबले एक महत्वपूर्ण बढ़त है। रकबे में यह विस्तार और बुवाई के समय मिट्टी में मौजूद पर्याप्त नमी उत्पादन को बड़े स्तर पर गिरने से रोकने में सहायक सिद्ध हुई है। पंजाब और हरियाणा जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में फिलहाल नुकसान के आंकड़े सीमित बताए जा रहे हैं। आने वाले सप्ताहों में मौसम की स्थिरता ही अंतिम उत्पादन और दानों की गुणवत्ता का वास्तविक रुख तय करेगी।
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