भारतीय खाद्य निगम द्वारा दिसंबर की शुरुआत से खुले बाजार बिक्री योजना यानी ओएमएसएस के तहत गेहूं की बिक्री को अस्थायी रूप से रोकने के बाद अब गेहूं की ई-नीलामी फिर से शुरू होने की संभावना बनती दिख रही है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, नवंबर और दिसंबर के शुरुआती दिनों में ओएमएसएस के तहत एफसीआई अपने भंडार से महज 5.3 लाख टन गेहूं ही बाजार में उतार सका, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 के लिए बिक्री का लक्ष्य 30 लाख टन तय किया गया था।
आटा मिलों और अन्य थोक खरीदारों की कमजोर भागीदारी के चलते एफसीआई को ओएमएसएस की साप्ताहिक बिक्री रोकनी पड़ी थी। हालांकि, बाजार से जुड़े जानकारों का मानना है कि यदि एफसीआई बड़े पैमाने पर अधिशेष गेहूं की बिक्री करता है, तो इससे खुले बाजार में कीमतों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
गौरतलब है कि वित्त वर्ष 2024-25 में एफसीआई ने अधिशेष भंडार से 30 लाख टन गेहूं खुले बाजार में बेचा था, जिससे कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिली थी। अधिकारियों का कहना है कि चालू वित्त वर्ष 2025-26 में भी निगम 20 लाख टन से अधिक गेहूं बाजार में उतार सकता है, ताकि बढ़ते स्टॉक का दबाव कम किया जा सके।
ओएमएसएस के तहत 2025-26 के लिए आटा मिलों जैसे थोक खरीदारों के लिए गेहूं का निर्गम मूल्य 2,550 रुपये प्रति क्विंटल, भाड़ा छोड़कर तय किया गया है, जबकि वर्तमान में खुले बाजार में गेहूं की कीमतें 2,800 से 2,850 रुपये प्रति क्विंटल के बीच बनी हुई हैं। इस अंतर के बावजूद मिलों की ओर से अपेक्षित खरीद न होने से एफसीआई की बिक्री गति धीमी रही।
आपको बता दें कि फिलहाल एफसीआई के पास 276.5 लाख टन गेहूं का भंडार उपलब्ध है, जो 1 जनवरी के लिए निर्धारित 138 लाख टन के बफर मानक से कहीं अधिक है। ऐसे में निगम के सामने एक ओर कीमतों को स्थिर रखने की चुनौती है, तो दूसरी ओर भंडार प्रबंधन का दबाव भी। उल्लेखनीय है कि 2026-27 विपणन सत्र के लिए सरकारी गेहूं खरीद 1 अप्रैल से शुरू होनी है, जिससे पहले ओएमएसएस के तहत बिक्री की रणनीति पर अंतिम निर्णय अहम माना जा रहा है।
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