महाराष्ट्र की लासल गांव कृषि उपज बाजार समिति में प्याज के दामों में आई तेज गिरावट ने प्याज उत्पादक किसानों की चिंता बढ़ा दी है। बीते सप्ताह की तुलना में प्याज की कीमतों में करीब 600 रुपय प्रति क्विंटल की कमी दर्ज की गई है, जबकि पिछले पंद्रह दिनों में भाव लगभग 1,000 रुपय प्रति क्विंटल तक टूट चुके हैं। बाजार में यह दबाव लासल गांव तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की अन्य प्रमुख मंडियों में भी लाल प्याज की भारी आवक के चलते कीमतें कमजोर बनी हुई हैं।
व्यापारिक हलकों का कहना है कि कीमतों में गिरावट के पीछे केवल घरेलू आपूर्ति ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कारक भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। बांग्लादेश में जारी राजनीतिक अस्थिरता के कारण भारत से होने वाले प्याज निर्यात पर असर पड़ा है। इसके अलावा, अरब देशों के बाजारों में चीन और पाकिस्तान से सस्ते दामों पर प्याज उपलब्ध होने से भारतीय प्याज की मांग कमजोर हुई है, जिसका सीधा असर घरेलू कीमतों पर पड़ा है।
आंकड़ों के मुताबिक, नाशिक जिले की विभिन्न कृषि उपज मंडियों में पिछले पंद्रह दिनों के दौरान करीब 20 लाख क्विंटल प्याज की आवक दर्ज की गई है। इतनी बड़ी मात्रा में आपूर्ति आने से किसानों को 175 करोड़ से 200 करोड़ रुपय तक के नुकसान की आशंका जताई जा रही है। किसानों का कहना है कि यदि कीमतों में गिरावट का यह सिलसिला जारी रहा, तो गर्मी के प्याज की तरह ही लाल प्याज की खेती में भी लागत निकालना मुश्किल हो जाएगा।
बिगड़ते हालात के बीच किसान संगठनों ने केंद्र और राज्य सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। किसानों का कहना है कि निर्यात को बढ़ावा देने के ठोस उपाय किए बिना बाजार में संतुलन लौटना कठिन होगा और इसका सीधा खामियाजा उत्पादकों को भुगतना पड़ेगा।
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