मध्य प्रदेश की इंदौर मंडी में चना के भावों में बीते सप्ताह मजबूती देखने को मिली। पिछले सप्ताह के मुकाबले कीमतें 100 रुपये प्रति क्विंटल बढ़कर 5,850 से 5,900 रुपये प्रति क्विंटल के दायरे में रही। बाजार में यह तेजी मुख्य रूप से बेहतर खरीदारी रुचि और त्योहारों से पहले दाल मिलों की बढ़ी हुई मांग का नतीजा रही।
व्यापारिक हलकों के अनुसार, मंडी में आवक सीमित बनी रही और किसान मौजूदा स्तर से कम दामों पर माल बेचने के पक्ष में नहीं दिखे, जिससे कीमतों को सहारा मिला। हालांकि, विदेशी आपूर्ति का दबाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। ऑस्ट्रेलिया से लगातार चना आयात और चालू रबी सीजन में बुवाई क्षेत्र में हुई बढ़ोतरी के चलते कीमतों में तेज उछाल की गुंजाइश सीमित मानी जा रही है।
विश्लेषकों का कहना है कि यदि घरेलू खपत में मजबूत और सतत बढ़ोतरी नहीं होती या मौसम से जुड़ी कोई बड़ी फसल संबंधी चिंता सामने नहीं आती, तो बाजार पर दबाव बना रह सकता है। ऐसे में किसी भी अल्पकालिक तेजी के दौरान व्यापारियों और स्टॉकिस्टों की ओर से बिकवाली आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
फिलहाल, मकर संक्रांति और पोंगल जैसे प्रमुख त्योहारों से पहले मांग का माहौल अनुकूल बना हुआ है, जिसके चलते निकट अवधि में चना की कीमतें सीमित दायरे में रहते हुए हल्की तेजी के रुझान के साथ टिके रहने की उम्मीद है। उधर, चना की बुवाई लगभग पूरी हो चुकी है और ठंडे मौसम की स्थिति फसल की संभावनाओं के लिए सकारात्मक मानी जा रही है।
जानकारों की मानें तो जब तक आवक में बड़ी बढ़त नहीं होती, तब तक कीमतों में गिरावट की संभावना कम है। हालांकि, सरकारी नीतियों और आयातित चने की खबरों पर भी बाजार की नजर बनी हुई है।
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