लंबे समय से सुस्त पड़ी उड़द की कीमतों में अब हरकत दिखनी शुरू हो गई है। बाजार को एक मजबूत ‘सपोर्ट’ मिला है। आज हम विश्लेषण करेंगे कि अचानक उड़द के भाव क्यों बढ़ रहे हैं और क्या यह तेजी टिकेगी? चलिए, आंकड़ों को समझते हैं।”
उत्तर प्रदेश की चंदौसी मंडी में बीते सप्ताह के दौरान उड़द की कीमतों में मजबूती देखने को मिली। पिछले सप्ताह के मुकाबले कीमतें 250 रुपये प्रति क्विंटल बढ़कर 7,250 से 7,300 रुपये प्रति क्विंटल के दायरे में पहुँच गईं। सीमित आपूर्ति और आगे की मांग को देखते हुए मिलों व व्यापारियों की सक्रिय खरीदारी के कारण बाजार में यह तेजी देखने को मिल रही है।
चालू रबी सीजन में देशभर में उड़द का रकबा पिछले साल की तुलना में कम रहा है, जिससे अल्पावधि में नई फसल की आवक सीमित रहने की आशंका है। इसी कारण मौसमी मांग से पहले स्टॉक सुरक्षित करने की रणनीति के तहत खरीदारी तेज हुई है। रबी उड़द की आवक आंध्र प्रदेश से फरवरी-मार्च के दौरान ही आने की संभावना जताई जा रही है। तब तक घरेलू बाजार मुख्य रूप से आयात और शेष खरीफ स्टॉक पर निर्भर रहेगा।
आयात मोर्चे पर भी स्थिति पूरी तरह सहज नहीं है। म्यांमार से आने वाली उड़द पर ऊंची लागत और भाड़ा दरों का दबाव बना हुआ है, जिससे कीमतों को अतिरिक्त समर्थन मिल रहा है। वहीं, ब्राज़ील से आयात में तेज गिरावट दर्ज की गई है। दूसरी ओर, अच्छी गुणवत्ता वाली घरेलू खरीफ उड़द के स्टॉक लगातार घट रहे हैं और बिकवाली सीमित बनी हुई है। इन सभी कारकों के चलते आपूर्ति को लेकर चिंताएँ बनी हुई हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि निकट अवधि में उड़द की कीमतों को समर्थन मिलता रह सकता है। जनवरी में त्योहारों को ध्यान में रखते हुए मौसमी मांग बढ़ने की संभावना भी बाजार को मजबूती प्रदान कर सकती है।
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