कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण ने जैविक किसानों के अनिवार्य भौतिक सत्यापन की समयसीमा को बढ़ाकर 3 जुलाई कर दिया है। बीते साल 3 नवंबर 2025 से शुरू हुई इस प्रक्रिया की समयसीमा दूसरी बार बढ़ाई गई है।
एपीडा के अनुसार, कमजोर नेटवर्क कनेक्टिविटी, किसानों के रिकॉर्ड अपडेट में देरी और काम के लिए किसानों के अस्थायी पलायन जैसी व्यावहारिक समस्याओं को देखते हुए यह राहत दी गई है। इस फैसले से प्रमाणन एजेंसियों और उत्पादक समूहों को देशव्यापी सत्यापन प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए जरूरी अतिरिक्त समय मिल गया है।
एपीडा अध्यक्ष अभिषेक देव ने बताया कि अब तक लगभग 52% किसानों का भौतिक सत्यापन पूरा हो चुका है। यह पूरी कवायद राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम के तहत चल रही है, जिसमें 4,712 उत्पादक समूहों से जुड़े 19.29 लाख से अधिक किसान शामिल हैं। एपीडा ने साथ ही एक सख्त चेतावनी भी जारी की है।
3 जुलाई की समयसीमा खत्म होने के बाद “ट्रेसनेट” प्रणाली उन किसानों से जुड़े कार्यों को स्वतः ब्लॉक कर देगी जिनका सत्यापन नहीं हुआ है। इससे उनके उत्पादों की सोर्सिंग और उत्पादन के अपडेट पर रोक लग जाएगी। जिन उत्पादक समूहों का सत्यापन अब तक 20% से भी कम है, उन्हें 3 जून तक कम से कम 50% काम पूरा करने का निर्देश दिया गया है।
ऐसा न करने पर उनके निर्यात लेनदेन प्रमाणपत्र रोके जा सकते हैं, जिससे उनका विदेश व्यापार ठप हो सकता है। वैश्विक बाजार में आजकल पारदर्शिता और प्रमाणन की शुद्धता को बहुत अधिक महत्व दिया जा रहा है। ऐसे में यह भौतिक सत्यापन भारत की जैविक निर्यात प्रणाली को अधिक मजबूत और भरोसेमंद बनाएगा, जिससे लंबे समय में किसानों को बेहतर अंतरराष्ट्रीय दाम मिल सकेंगे।
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