दलहन बाजार अपडेट: तूर में तेजी, चना और उड़द की कीमतें स्थिर

देश के दलहन बाजारों में इन दिनों मिला-जुला माहौल देखने को मिल रहा है। चने की बात करें तो अकोला मंडी में इसके भाव 25 रुपये बढ़कर 5,775 से 5,800 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं। सीमित आवक और जरूरत के हिसाब से हो रही छिटपुट खरीदारी ने कीमतों को मामूली सहारा दिया है।

हालांकि, इंदौर मंडी में भाव 5,700 से 5,750 रुपये के स्तर पर स्थिर बने हुए हैं, क्योंकि भीषण गर्मी के कारण चने की दाल की कुल मांग फिलहाल काफी कमजोर नजर आ रही है।

केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र में तूर और चने की सरकारी खरीद की समयसीमा बढ़ाकर 31 मई कर दी है। इसके साथ ही, राज्य के लिए चने की खरीद का लक्ष्य भी लगभग 58 हजार टन बढ़ाकर अब 8,19,882 टन कर दिया गया है। सरकार के इस कदम से बाजार धारणा को मजबूती मिली है और आने वाले दिनों में आवक बढ़ने पर भी कीमतों में बहुत ज्यादा गिरावट की संभावना कम हो गई है।

दालों में सबसे ज्यादा मजबूती तूर (अरहर) के बाजार में देखी जा रही है। मिलों की तगड़ी मांग और नई फसल की कम आवक के चलते अकोला में तूर के दाम 50 रुपये बढ़कर 8,075 से 8,100 रुपये प्रति क्विंटल हो गए हैं। मध्य प्रदेश की कटनी मंडी में भी इसी तरह का रुझान रहा और भाव 8,200 से 8,300 रुपये प्रति क्विंटल तक जा पहुंचे। मिलर्स द्वारा स्टॉक जमा करने की सक्रियता ने तूर की कीमतों को बढ़त की दिशा में बनाए रखा है।

दूसरी ओर, चंदौसी और जयपुर जैसी प्रमुख मंडियों में उड़द का बाजार पूरी तरह स्थिर बना हुआ है। गर्मी के मौसम में उड़द की खपत कम होना और बाजार में स्टॉक की पर्याप्त उपलब्धता इसकी कीमतों को एक सीमित दायरे में बांधे हुए है। जानकारों का मानना है कि जब तक मध्य प्रदेश और गुजरात से ग्रीष्मकालीन उड़द की आवक पूरी तरह से शुरू नहीं होती, इसके भावों में कोई बड़ी हलचल होने की उम्मीद कम ही है।

कुल मिलाकर, दाल बाजार फिलहाल एक संतुलन की स्थिति में है जहाँ कम आवक और सरकारी समर्थन एक तरफ खड़ा है, तो दूसरी तरफ गर्मी के कारण सुस्त पड़ी मांग कीमतों को बहुत ज्यादा ऊपर जाने से रोक रही है। फिलहाल व्यापार केवल चुनिंदा दालों और तत्काल जरूरत के आधार पर ही सिमटा हुआ है।

निष्कर्ष: देश के दलहन बाजार में वर्तमान में मांग और आपूर्ति के बीच एक संतुलन बना हुआ है, जिससे कीमतों में मिला-जुला रुख देखने को मिल रहा है। एक तरफ जहां मिलों की मजबूत मांग और कम आवक के कारण तूर (अरहर) की कीमतों में तेजी बनी हुई है, वहीं दूसरी तरफ भीषण गर्मी के चलते मांग कमजोर होने से चना और उड़द के भावों में स्थिरता का माहौल है।

इसके अतिरिक्त, सरकार द्वारा महाराष्ट्र में चना और तूर की सरकारी खरीद की समयसीमा बढ़ाने और चने का खरीद लक्ष्य बढ़ाने जैसे कदमों ने बाजार की धारणा को मजबूत किया है, जिससे आने वाले समय में आवक बढ़ने पर भी कीमतों में बड़ी गिरावट की संभावना कम हो गई है।

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