सरकार ने खरीफ फसलों के MSP में बढ़ोतरी को दी मंजूरी

केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने विपणन सीजन 2026-27 की 14 प्रमुख खरीफ फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी की घोषणा कर दी है। सरकार का यह कदम खरीफ सीजन की बुवाई से ठीक पहले किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने और उन्हें फसलों का उचित मूल्य सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

खरीफ फसलों की एमएसपी में बढ़ोतरी की घोषणा का सबसे ज्यादा लाभ सूरजमुखी के बीज उत्पादक किसानों को मिला है। सरकार ने इसके समर्थन मूल्य में सीधे 622 रुपये प्रति क्विंटल की भारी बढ़ोतरी की है, जिससे अब इसका भाव 7,721 रुपये से बढ़कर 8,343 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है।

इसी तरह सफेद सोना कहे जाने वाले कपास की एमएसपी में भी 557 रुपये का इजाफा किया गया है, जिसके बाद अब किसानों को प्रति क्विंटल 8,267 रुपये का दाम मिलेगा। देश की सबसे मुख्य फसल धान के मोर्चे पर भी सरकार ने राहत दी है। धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य को 2,369 रुपये से बढ़ाकर अब 2,441 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है।

मोटे अनाजों को बढ़ावा देने की कड़ी में बाजरा की कीमत अब 2,900 रुपये और रागी का भाव 4,886 रुपये से बढ़ाकर 5,205 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए दालों की एमएसपी में भी शानदार बढ़त दर्ज की गई है। अरहर (तुअर) के दाम में 450 रुपये की वृद्धि कर इसे अब 8,450 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है।

उड़द उगाने वाले किसानों को भी 400 रुपये का सीधा फायदा मिलेगा और नई दर 8,200 रुपये प्रति क्विंटल होगी। वहीं, तिलहन फसलों में मूंगफली का भाव भी बढ़ाकर 7,517 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है।

सरकार का मानना है कि समर्थन मूल्य में इस तरह की समयबद्ध बढ़ोतरी से न केवल कृषि क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा, बल्कि किसानों को नई तकनीक और बेहतर बीजों के इस्तेमाल के लिए भी प्रोत्साहन मिलेगा। इन नई दरों से बाजार में स्थिरता बनी रहेगी और किसानों को बिचौलियों के बजाय सीधे सरकारी खरीद केंद्रों पर अपनी उपज बेचने का लाभ मिलेगा।

निष्कर्ष: केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा विपणन सीजन 2026-27 के लिए 14 प्रमुख खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में की गई यह बढ़ोतरी कृषि क्षेत्र और किसानों की आर्थिक उन्नति की दिशा में एक बेहद सराहनीय और समयबद्ध कदम है।

सूरजमुखी, कपास, धान और दालों जैसी फसलों के दामों में की गई इस महत्वपूर्ण वृद्धि से न केवल किसानों को अपनी उपज का सही मूल्य मिलेगा और बिचौलियों से मुक्ति मिलेगी, बल्कि यह उन्हें आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए भी प्रेरित करेगी।

विशेष रूप से तिलहन और दलहन की कीमतों में बड़ा इजाफा देश को इन क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बनाने और बाजार में स्थिरता लाने में मील का पत्थर साबित होगा, जो अंततः ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई मजबूती प्रदान करेगा।

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