अनाज बाजार में स्थिरता; गेहूं, मक्का और चावल के दाम सीमित दायरे में

देश के प्रमुख अनाज बाजारों में फिलहाल स्थिरता का माहौल बना हुआ है। गेहूं, मक्का और चावल की कीमतों में किसी बड़ी उठापटक के बजाय एक सीमित दायरे में कारोबार देखा जा रहा है।

इसका मुख्य कारण बाजार में मांग और आपूर्ति के बीच बना हुआ वर्तमान संतुलन है। हालांकि, भविष्य की अनिश्चितताओं को देखते हुए व्यापारी और खरीदार दोनों ही अभी ‘रुको और देखो’ की नीति अपना रहे हैं।

इंदौर और वाशी जैसी प्रमुख मंडियों में गेहूं के दाम स्थिर बने हुए हैं। इंदौर में भाव 2,580 रुपये प्रति क्विंटल पर टिके रहे, क्योंकि मंडियों में पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और खरीदार केवल अपनी तत्काल जरूरत के हिसाब से ही सौदे कर रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि गेहूं के उत्पादन को लेकर दो अलग-अलग अनुमान सामने आ रहे हैं।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भरोसा जताया है कि इस साल उत्पादन पिछले साल के 1179.4 लाख टन के रिकॉर्ड को पार कर जाएगा, वहीं रोलर फ्लोर मिलर्स फेडरेशन ने इसके 1100 लाख टन के आसपास रहने की आशंका जताई है। फिलहाल वाशी मंडी में भी भाव 2,700 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हैं और जून के बाद मांग बढ़ने की उम्मीद है।

मक्का के बाजार में अभी इंदौर में 2,125 रुपये प्रति क्विंटल का भाव चल रहा है। अल्पावधि में बिहार से आने वाली ग्रीष्मकालीन मक्का की नई खेप कीमतों पर दबाव बना सकती है, लेकिन लंबी अवधि की कहानी अलग नजर आ रही है।

खरीफ बुवाई के क्षेत्र में संभावित कमी और पश्चिम एशिया के संकट के चलते उर्वरक आपूर्ति में होने वाली बाधाएं भविष्य में कीमतों को ऊपर ले जा सकती हैं। व्यापारियों का मानना है कि इन इनपुट लागतों में बढ़ोत्तरी मक्का बाजार को मध्यम अवधि में मजबूती प्रदान करेगी। चावल बाजार में फिलहाल कोई बड़ी हलचल नहीं है।

वाशी मंडी में 1401 बासमती का भाव 9,500 से 9,600 रुपये और 1121 बासमती 10,000 से 10,200 रुपये प्रति क्विंटल के बीच कारोबार कर रहा है। घरेलू खपत और निर्यात मांग दोनों ही मोर्चों पर नरमी देखी जा रही है, जिससे कीमतों में उछाल की संभावना कम है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में मानसून की स्थिति और कृषि इनपुट पर पड़ने वाले भू-राजनीतिक असर ही तय करेंगे कि अनाज मंडियों का ऊँट किस करवट बैठेगा।

निष्कर्ष: प्रस्तुत जानकारी से यह स्पष्ट होता है कि वर्तमान में देश के प्रमुख अनाज बाजारों में मांग और आपूर्ति के संतुलन के कारण गेहूं, मक्का और चावल की कीमतों में स्थिरता बनी हुई है।

हालांकि, यह स्थिरता दीर्घकालिक नहीं कही जा सकती, क्योंकि गेहूं के उत्पादन को लेकर सरकारी और निजी अनुमानों में अंतर है, तथा बिहार से मक्के की नई आवक से अल्पावधि में गिरावट आ सकती है।

इसके विपरीत, आगामी समय में खरीफ बुवाई के क्षेत्र में कमी, पश्चिम एशिया के संकट के कारण उर्वरक आपूर्ति में बाधा और मानसून की अनिश्चितता जैसे कारक मध्यम से लंबी अवधि में कीमतों को बढ़ा सकते हैं।

यही वजह है कि बाजार के खिलाड़ी अभी ‘रुको और देखो’ की सतर्क नीति अपना रहे हैं, और आने वाले दिनों में अनाज मंडियों की दिशा काफी हद तक मौसमी और भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।

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