सीएसीपी की चेतावनी: उर्वरक सब्सिडी में कटौती से घटेगा कृषि उत्पादन

कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) ने उर्वरक सब्सिडी को अचानक समाप्त करने या पूरी तरह प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) में बदलने को लेकर सरकार को आगाह किया है। आयोग का मानना है कि ऐसे किसी भी कदम से खाद की खपत घट सकती है, जिसका सीधा और नकारात्मक असर देश के कुल कृषि उत्पादन पर पड़ेगा।

गौरतलब है कि वैश्विक परिस्थितियों और पश्चिम एशिया संकट के चलते खाद की कीमतों में उछाल आया है। इसके कारण वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का उर्वरक सब्सिडी बिल बजट अनुमान 1.67 लाख करोड़ से बढ़कर 2.17 लाख करोड़ के पार जाने की आशंका है। आयोग ने सब्सिडी व्यवस्था में बड़े बदलाव के बजाय ‘एग्रीस्टैक’ जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग की सलाह दी है।

इसके माध्यम से सब्सिडी की लीकेज को कम किया जा सकता है और पोषक तत्वों के असंतुलन को बिना उत्पादन प्रभावित किए सुधारा जा सकता है। मिट्टी की गुणवत्ता पर चिंता जताते हुए आयोग ने यूरिया और डीएपी के अत्यधिक उपयोग को कम करने पर जोर दिया है।

इसके लिए दशकों पुराने पारंपरिक 4:2:1 (NPK) अनुपात की समीक्षा करने और क्षेत्रवार नए मानक तय करने की सिफारिश की गई है। नई नीति रिपोर्ट में सूक्ष्म पोषक तत्वों के उपयोग और मिट्टी में जैविक कार्बन स्तर को सुधारने की आवश्यकता बताई गई है।

आयोग का कहना है कि बदलती फसल प्रणालियों और सिंचाई पद्धतियों के आधार पर अब पोषक तत्वों का प्रबंधन भी आधुनिक होना चाहिए। एक महत्वपूर्ण सिफारिश में आयोग ने उन राज्यों में एमएसपी खरीद पर सीमा तय करने का सुझाव दिया है, जो एमएसपी के ऊपर अतिरिक्त बोनस देते हैं।

बढ़ते खाद्यान्न भंडार और भंडारण के दबाव को देखते हुए सरकारी खर्च को नियंत्रित करने के लिए यह कदम जरूरी माना जा रहा है। कुल मिलाकर ये सिफारिशें उर्वरक सब्सिडी की दीर्घकालिक स्थिरता और मिट्टी के पोषण संतुलन को लेकर बढ़ती चिंताओं को दर्शाती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन सुझावों पर अमल से कृषि क्षेत्र में सरकारी खर्च और उत्पादकता के बीच एक बेहतर संतुलन बनाया जा सकेगा।

निष्कर्ष: कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) ने देश के कृषि उत्पादन को प्रभावित किए बिना उर्वरक सब्सिडी के आर्थिक बोझ और मिट्टी के गिरते स्वास्थ्य के बीच एक सही संतुलन बनाने पर जोर दिया है।

आयोग का मानना है कि खाद सब्सिडी में अचानक कटौती या बदलाव करने से उत्पादन घट सकता है, इसलिए सब्सिडी बंद करने के बजाय वैश्विक स्तर पर बढ़ती कीमतों के इस दौर में ‘एग्रीस्टैक’ जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए लीकेज रोकना अधिक समझदारी भरा कदम होगा।

इसके साथ ही, मिट्टी की गुणवत्ता को बचाने के लिए दशकों पुराने पारंपरिक उर्वरक अनुपात (NPK) की समीक्षा करने, क्षेत्रवार नए मानक तय करने और बोनस देने वाले राज्यों में एमएसपी (MSP) खरीद की सीमा तय करने जैसी सिफारिशें की गई हैं, ताकि बढ़ते सरकारी खर्च को नियंत्रित करते हुए देश के कृषि क्षेत्र को दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ और उत्पादक बनाया जा सके।

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