बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने एग्री स्टैक कार्यक्रम के तहत किसान आईडी जारी करने के दूसरे चरण की शुरुआत कर दी है। इस महत्वपूर्ण पहल का उद्देश्य राज्य के किसानों को एक सशक्त डिजिटल पहचान प्रदान करना है। इस अभियान के दूसरे चरण की औपचारिक शुरुआत पटना के फुलवारी शरीफ प्रखंड से की गई।
परियोजना की प्रगति साझा करते हुए मंत्री ने बताया कि अब तक पंजीकृत लगभग 55% किसानों को उनकी विशिष्ट किसान आईडी मिल चुकी है। वर्तमान डेटा के अनुसार, 47.85 लाख पंजीकृत किसानों में से करीब 23.79 लाख पीएम-किसान लाभार्थियों को यह कार्ड जारी किया जा चुका है। सरकार अब जल्द ही 40.54 लाख अन्य किसानों को भी इस डिजिटल दायरे में लाने वाली है।
बिहार में कृषि सब्सिडी, मुआवजा और फसल सहायता जैसी विभिन्न योजनाओं के लिए लगभग दो करोड़ किसान पात्र माने जाते हैं। इनमें से 75 लाख किसान सीधे प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना से जुड़े हैं। किसान आईडी बनने से इन सभी लाभार्थियों को खाद, बीज और अन्य सहायता प्राप्त करने में अब किसी भी बिचौलिए की जरूरत नहीं पड़ेगी।
डिजिटल पंजीकरण के साथ-साथ राज्य में भूमि सर्वेक्षण का काम भी जोरों पर है। अब तक लगभग 47 लाख भूमि खंडों का डिजिटल सर्वे पूरा हो चुका है। हजारों राजस्व गांवों में चल रही इस प्रक्रिया से यह सुनिश्चित होगा कि सरकारी सहायता केवल उन्हीं किसानों को मिले जो वास्तव में संबंधित भूमि पर खेती कर रहे हैं।
कृषि मंत्री का मानना है कि इस नई प्रणाली से न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि भ्रष्टाचार पर भी लगाम लगेगी। किसान आईडी एक ऐसा ‘यूनिक कोड’ बनेगा जिससे सरकार को सहायता वितरण में सटीकता मिलेगी। यह व्यवस्था भविष्य में बिहार की कृषि सहायता वितरण प्रणाली को देश के सबसे प्रभावी मॉडलों में से एक बना सकती है।
निष्कर्ष: बिहार सरकार द्वारा ‘एग्री स्टैक’ कार्यक्रम के तहत शुरू किया गया किसान आईडी का दूसरा चरण राज्य के कृषि क्षेत्र में एक बड़ा डिजिटल बदलाव है।
इस पहल और चल रहे डिजिटल भूमि सर्वेक्षण के माध्यम से करीब 40 लाख और किसानों को एक विशिष्ट डिजिटल पहचान मिलेगी, जिससे खाद, बीज, सब्सिडी और फसल सहायता जैसी सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी बिचौलिए के सीधे वास्तविक किसानों तक पहुँच सकेगा।
कुल मिलाकर, यह पारदर्शी व्यवस्था कृषि सहायता वितरण से भ्रष्टाचार को खत्म करने और बिहार के कृषि मॉडल को देश में अधिक सटीक और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
यह भी पढ़े: सीएसीपी की चेतावनी: उर्वरक सब्सिडी में कटौती से घटेगा कृषि उत्पादन
जागरूक रहिए व नुकसान से बचिए और अन्य लोगों के जागरूकता के लिए साझा करें। कृषि लेख, सरकारी योजनाएं, कृषि तकनीक, व्यवसायिक एवं जैविक खेती से संबंधित सटीक जानकारियां प्राप्त करने के लिए जुड़े कृषि जागृति चलो गांव की ओर से या कृषि संबंधित किसी भी समस्या के जैविक समाधान के लिए WhatsApp करें।
कृषि जागृति-Krishi Jagriti एक अग्रणी डिजिटल समाचार मंच है, जो भारतीय किसानों को सशक्त बनाने के लिए समर्पित है। हमारा उद्देश्य किसानों तक नवीनतम कृषि लेख, सरकारी योजनाएं, उन्नत कृषि तकनीक, बाजार भाव और जैविक खेती से संबंधित सटीक और उपयोगी जानकारियों का प्रसारण करना है। हम ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों के जीवन में सकारात्मक सुधार लाने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं।
