क्या आपने कभी सोचा है कि सरकारी गोदामों में रखा लाखों टन अनाज, दालें और तिलहन आखिर बिकते कैसे हैं? अब तक इसके लिए बाहरी पोर्टल्स का सहारा लिया जाता था, लेकिन अब खेल बदलने वाला है। NAFED यानी भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ ने अपना खुद का डिजिटल ई-नीलामी प्लेटफॉर्म लॉन्च कर दिया है।
तिलहन और दालों की सरकारी खरीद की सबसे बड़ी एजेंसी नैफेड 19 जनवरी से कृषि जिंसों की बिक्री के लिए अपना ई-नीलामी पोर्टल शुरू करने जा रही है। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, यह नया डिजिटल प्लेटफॉर्म सरकारी खरीद के बाद जिंसों के निपटान की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
अधिकारी ने बताया कि Nafex.in नामक इस पोर्टल पर भविष्य में राज्य स्तर की सहकारी संस्थाओं और सरकारी एजेंसियों को भी अपनी ई-नीलामी आयोजित करने की अनुमति देने पर विचार किया जा रहा है। यह पोर्टल परामर्श कंपनी डेलॉइट के सहयोग से विकसित किया गया है, ताकि तकनीकी रूप से मजबूत और सुरक्षित प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराया जा सके।
वर्तमान व्यवस्था में नैफेड किसानों से मूल्य समर्थन योजना और मूल्य स्थिरीकरण कोष के तहत हर वर्ष खरीदी जाने वाली करीब 53 लाख टन दालों और तिलहनों की बिक्री के लिए निजी ई-नीलामी प्लेटफॉर्म का सहारा लेता है। इनमें एमजंक्शन, एनसीडीईएक्स ई-मार्केट्स और ई-टीच शामिल हैं। इन्हीं प्लेटफॉर्म्स का उपयोग एक अन्य सरकारी एजेंसी नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया भी सरकारी योजनाओं के तहत खरीदी गई जिंसों की ई-नीलामी के लिए करती है।
निजी प्लेटफॉर्म पर निर्भरता के चलते खरीदारों से कारोबार किए गए कुल मूल्य पर लगभग 0.03 प्रतिशत का शुल्क लिया जाता है। अधिकारियों का मानना है कि नैफेड के अपने ई-नीलामी पोर्टल के शुरू होने से न केवल यह लागत घटाई जा सकेगी, बल्कि सरकारी एजेंसियों को जिंसों की बिक्री प्रक्रिया पर अधिक नियंत्रण और लचीलापन भी मिलेगा।
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