चालू विपणन वर्ष 2025-26 में भारत के सोया खली निर्यात में भारी गिरावट आने की आशंका जताई जा रही है। घरेलू बाजार में कीमतों में आए अचानक और भारी उछाल के कारण वैश्विक बाजार में भारतीय आपूर्ति की स्थिति कमजोर पड़ गई है। इसके चलते निर्यात के आंकड़े पिछले चार वर्षों के सबसे निचले स्तर पर पहुंचने का अनुमान है।
उद्योग जगत के अधिकारियों के अनुसार, पिछले महज एक महीने में ही भारत में सोया खली की कीमतों में लगभग 47 प्रतिशत की रिकॉर्ड तेजी आई है। इस अप्रत्याशित मूल्य वृद्धि के कारण विदेशी खरीदार अब भारत के बजाय दक्षिण अमेरिकी आपूर्तिकर्ताओं की ओर रुख कर रहे हैं, जहां उन्हें अपेक्षाकृत कम कीमतों पर उत्पाद आसानी से मिल रहा है।
इस रुझान का सीधा असर निर्यात के आंकड़ों पर दिखने लगा है। उद्योग के ताजा अनुमानों के मुताबिक, सितंबर 2026 में समाप्त होने वाले विपणन वर्ष में भारत का सोया खली निर्यात लगभग आधे से भी कम होकर महज 9 लाख टन तक सिमट सकता है। गौरतलब है कि पिछले वर्ष देश ने 20.2 लाख टन सोया खली का सफलतापूर्वक निर्यात किया था।
भारत दुनिया में वनस्पति तेलों का सबसे बड़ा आयातक है और अपनी अतिरिक्त सोया खली का निर्यात मुख्य रूप से बांग्लादेश, नेपाल, जर्मनी और नीदरलैंड जैसे देशों को करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय सोया खली को एक ‘प्रीमियम उत्पाद’ का दर्जा हासिल है, क्योंकि इसे गैर-आनुवंशिक रूप से संशोधित सोयाबीन बीजों से तैयार किया जाता है।
वर्तमान में घरेलू बाजार के भीतर सोया खली की कीमतें उछलकर लगभग 64,625 रुपये प्रति टन के स्तर पर पहुंच गई हैं। 1 अक्टूबर से शुरू हुए विपणन सत्र से लेकर अब तक कीमतों में करीब 85 प्रतिशत की अभूतपूर्व तेजी दर्ज की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतिकूल मौसम के कारण सोयाबीन उत्पादन में आई कमी और घरेलू पोल्ट्री फीड सेक्टर की लगातार मजबूत मांग ने कीमतों को इस रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचा दिया है।
निष्कर्ष: घरेलू बाजार में सोया खली की कीमतों में आई अप्रत्याशित तेजी (लगभग 47% से 85% तक की वृद्धि) और प्रतिकूल मौसम के कारण सोयाबीन के कम उत्पादन ने भारत के सोया खली निर्यात को गहरे संकट में डाल दिया है।
इसके चलते, अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैर-आनुवंशिक रूप से संशोधित (Non-GMO) ‘प्रीमियम उत्पाद’ होने के बावजूद, भारतीय सोया खली वैश्विक प्रतिस्पर्धा में पिछड़ रही है और विदेशी खरीदार दक्षिण अमेरिकी देशों का रुख कर रहे हैं।
नतीजतन, चालू विपणन वर्ष 2025-26 में भारत का सोया खली निर्यात पिछले वर्ष के 20.2 लाख टन से आधे से भी कम होकर महज 9 लाख टन पर सिमटने की आशंका है, जो पिछले चार वर्षों का सबसे निचला स्तर होगा।
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