इस समय कई इलाकों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। तेज गर्म हवा और दोपहर की तपती धूप के कारण धान की नर्सरी यानी बेहन में पौध जलने की समस्या तेजी से बढ़ रही है। कई किसान भाई शिकायत कर रहे हैं कि सुबह तक हरी दिखने वाली पौध दोपहर में पीली और सूखी नजर आने लगती है। इसका सबसे बड़ा कारण है गलत समय पर सिंचाई करना।
बहुत से किसान सुबह के समय धान की नर्सरी में पानी लगा देते हैं। लेकिन तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण वही पानी दिनभर गर्म होता रहता है। गर्म पानी और गर्म मिट्टी मिलकर पौधों की जड़ों पर बुरा असर डालते हैं। इससे पौधे हीट स्ट्रेस में चले जाते हैं और धीरे-धीरे पत्तियां जलने लगती हैं। धान की नर्सरी में छोटे पौधे बहुत नाजुक होते हैं।
उनकी जड़ें गहराई तक विकसित नहीं होती। इसलिए अधिक तापमान का असर सबसे पहले नर्सरी पर ही दिखाई देता है। अगर समय रहते सावधानी नहीं बरती गई तो पूरी नर्सरी खराब हो सकती है। वैज्ञानिकों के अनुसार गर्म मौसम में धान की नर्सरी में सिंचाई हमेशा शाम के समय करनी चाहिए।
शाम को दिया गया पानी रातभर मिट्टी में नमी बनाए रखता है और पौधों को ठंडक देता है। इससे पौधों को गर्मी से राहत मिलती है और जड़ों का विकास भी बेहतर होता है। सुबह की बजाय शाम की सिंचाई इसलिए भी जरूरी है क्योंकि रात में वाष्पीकरण कम होता है। यानी पानी जल्दी उड़ता नहीं है और पौधे अधिक समय तक नमी का लाभ ले पाते हैं।
अगर आपके क्षेत्र में लू चल रही है तो नर्सरी के चारों ओर मक्का, बाजरा या चरी जैसी फसल लगाकर गर्म हवाओं से बचाव भी किया जा सकता है। यह प्राकृतिक सुरक्षा कवच की तरह काम करती हैं और सीधे गर्म हवा के प्रभाव को कम करती हैं। इसके अलावा दोपहर के समय नर्सरी में पानी भरकर रखने से भी बचें। बहुत अधिक गर्म पानी पौधों को नुकसान पहुंचा सकता है।
हल्की नमी बनाए रखें लेकिन जलभराव न होने दें। हो सके तो नर्सरी में 15 किलोग्राम 12 माह पुरानी सड़ी हुई गोबर की खाद और एक किलोग्राम समुंद्री शैवाल यानी जी-सी पवार या जी-प्रोम एडवांस को संध्या के समय मिलाकर छिड़काव करें। इससे नर्सरी के पौधों को तेज धूप में भी ठंडक मिलती रहेगी। कोशिश करें कि धान की नर्सरी को एक से डेढ़ फुट ऊपर से मेट से ढक दें ताकि तेज धूम में पौधे जले नहीं।
याद रखिए किसान भाइयों, धान की मजबूत पौध ही अच्छी फसल की नींव होती है। अगर नर्सरी कमजोर हो गई तो बाद में खाद और दवाइयों पर खर्च बढ़ता जाएगा लेकिन उत्पादन प्रभावित रहेगा। इसलिए मौसम को समझकर सिंचाई करें और अपनी मेहनत तथा पैसे दोनों को बचाएं।
क्या आपके क्षेत्र में भी धान की पौध जलने की समस्या आ रही है?
आप सुबह पानी देते हैं या शाम को?
निष्कर्ष: भीषण गर्मी (40 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान) और लू के दिनों में धान की नर्सरी (बेहन) को बचाने के लिए सिंचाई के सही समय और सही प्रबंधन का होना बेहद जरूरी है।
सुबह के समय पानी लगाने से दिनभर धूप में पानी गर्म होकर पौधों की नाजुक जड़ों को नुकसान पहुँचाता है और पत्तियां झुलसने लगती हैं, इसलिए वैज्ञानिकों के अनुसार सिंचाई हमेशा शाम को करनी चाहिए ताकि रातभर नमी बनी रहे और वाष्पीकरण कम हो।
इसके अलावा, दोपहर में जलभराव से बचकर केवल हल्की नमी बनाए रखना, नर्सरी के चारों ओर मक्का या बाजरे जैसी सुरक्षात्मक फसलें लगाना, ऊपर से नेट से ढकना और शाम के समय सड़ी हुई गोबर की खाद व समुद्री शैवाल (सीवीड) का छिड़काव करने जैसे उपाय धान की पौध को जलने से बचा सकते हैं, जिससे भविष्य में अच्छी फसल की मजबूत नींव तैयार होती है।
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मेरा नाम Anil Kumar Prasad है। मैं एक प्रगतिशील किसान हूं और पिछले 5 वर्षों से खेती की बारीकियों को धरातल पर सीख और समझ रहा हूं। ‘कृषि जागृति – चलो गांव की ओर’ के माध्यम से मैं अपने निजी अनुभव और खेती की सटीक जानकारी साझा करता हूं। मेरा उद्देश्य सरकारी योजनाओं, आधुनिक तकनीक और जैविक खेती के जरिए साथी किसानों को सशक्त बनाना है।
