पीली मटर और चना आयात में कमी, दलहन आयात 18% घटा

वाणिज्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों ने भारत के दाल आयात की एक दिलचस्प तस्वीर पेश की है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान देश के कुल दाल आयात में सालाना आधार पर लगभग 18 प्रतिशत की कमी आई है, जिससे कुल आयात का आंकड़ा 59.6 लाख टन पर सिमट गया है। आयात में इस गिरावट का मुख्य कारण पीली मटर और चने की वैश्विक खरीद में आई बड़ी कमी को माना जा रहा है।

भले ही कुल आयात में गिरावट दर्ज की गई हो, लेकिन अरहर और उड़द जैसी प्रमुख दालों की मांग में जबरदस्त तेजी देखी गई है। अरहर का आयात 21 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 14.8 लाख टन तक पहुंच गया, जो अब भारत के कुल दाल आयात का लगभग एक-चौथाई हिस्सा है।

इस मामले में मोजाम्बिक 5.9 लाख टन की आपूर्ति के साथ भारत का सबसे बड़ा भरोसेमंद साथी बनकर उभरा है, जिसके बाद म्यांमार और तंजानिया का स्थान रहा। उड़द के बाजार में भी इसी तरह की तेजी दर्ज की गई, जहाँ आयात 28 प्रतिशत से अधिक की छलांग लगाकर 10.5 लाख टन हो गया है।

यहाँ म्यांमार ने अपनी बादशाहत बरकरार रखते हुए करीब 7.8 लाख टन उड़द की आपूर्ति की। हालांकि, इस बार ब्राजील ने भी भारतीय बाजार में अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हुए 2.4 लाख टन से अधिक उड़द का निर्यात किया है, जो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आते बदलावों का संकेत है।

दूसरी ओर, मसूर और पीली मटर के आयात आंकड़ों में सुस्ती देखी गई है। मसूर का आयात करीब 6 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 11.5 लाख टन रहा, जिसकी मुख्य आपूर्ति ‘ ऑस्ट्रेलिया और कनाडा से हुई। वहीं, पीली मटर के आयात में सबसे जोरदार गिरावट दर्ज की गई।

इसका आयात करीब 49 प्रतिशत तक गिरकर महज 11.1 लाख टन रह गया है, जिसमें कनाडा और रूस प्रमुख आपूर्तिकर्ता देश बने रहे। चने के मोर्चे पर भी भारत ने विदेशी निर्भरता कम की है, जहाँ आयात में 33 प्रतिशत की कमी आई और यह घटकर 10.1 लाख टन रह गया।

मूंग, राजमा और अन्य छोटी दालों के आयात में भी करीब 49 प्रतिशत की बड़ी गिरावट देखी गई है। कुल मिलाकर, ये आंकड़े संकेत देते हैं कि भारत चुनिंदा दालों के लिए नए बाजारों की तलाश कर रहा है, जबकि कुछ फसलों में घरेलू आत्मनिर्भरता बढ़ रही है।

निष्कर्ष: वित्त वर्ष 2025-26 में भारत के कुल दाल आयात में 18% की गिरावट घरेलू आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदमों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आ रहे बदलावों को दर्शाती है। जहाँ एक तरफ पीली मटर, चने और अन्य छोटी दालों के आयात में भारी कमी आने से विदेशी निर्भरता कम हुई है।

वहीं दूसरी तरफ अरहर और उड़द जैसी प्रमुख दालों की घरेलू मांग को पूरा करने के लिए आयात में क्रमशः 21% और 28% की बड़ी उछाल दर्ज की गई है। कुल मिलाकर, ये आंकड़े यह साफ संकेत देते हैं कि भारत चुनिंदा दालों के उत्पादन में आत्मनिर्भर हो रहा है, जबकि अन्य जरूरी दालों के लिए मोजाम्बिक, म्यांमार और अब ब्राजील जैसे नए व भरोसेमंद अंतरराष्ट्रीय बाजारों के साथ अपनी व्यापारिक रणनीतियों को मजबूत कर रहा है।

यह भी पढ़े: पंजाब में धान सीजन के दौरान किसानों को 8 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति का वादा

जागरूक रहिए व नुकसान से बचिए और अन्य लोगों के जागरूकता के लिए साझा करें। कृषि लेख, सरकारी योजनाएं, कृषि तकनीक, व्यवसायिक एवं जैविक खेती से संबंधित सटीक जानकारियां प्राप्त करने के लिए जुड़े कृषि जागृति चलो गांव की ओर से या कृषि संबंधित किसी भी समस्या के जैविक समाधान के लिए WhatsApp करें।