किसानों के लिए आज खेती में सबसे बड़ी चुनौती क्या है? बढ़ते कीट और बढ़ती दवा की लागत। हर साल किसान भाई अपनी फसल बचाने के लिए महंगे रासायनिक कीटनाशकों का बार-बार छिड़काव करते हैं। लेकिन लगातार रसायनों के प्रयोग से केवल कीट ही नहीं मरते, बल्कि हमारी मिट्टी, फसल और पर्यावरण भी प्रभावित होता है। धीरे-धीरे यही जहरीले रसायन हमारे भोजन और शरीर तक पहुंच जाते हैं।
इसी कारण अब समय आ गया है कि किसान भाई कीट नियंत्रण के ऐसे तरीके अपनाएं जो कम खर्चीले भी हों, पर्यावरण के लिए सुरक्षित भी हों और फसल को बिना नुकसान पहुंचाए कीटों को नियंत्रित भी करें। ऐसे ही दो बहुत प्रभावी और आधुनिक तरीके हैं- सोलर लाइट ट्रैप और फेरोमोन ट्रैप। फेरोमोन ट्रैप आज कीटनाशक मुक्त खेती की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम माना जा रहा है।
यह एक वैज्ञानिक तकनीक है जिसमें विशेष प्रकार की गंध यानी फेरोमोन का उपयोग करके नर कीटों को आकर्षित किया जाता है। जैसे ही नर कीट ट्रैप में फंसते हैं, उनका प्रजनन चक्र टूटने लगता है और खेत में कीटों की संख्या धीरे-धीरे कम होने लगती है। इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह केवल नुकसान पहुंचाने वाले विशेष कीटों को ही नियंत्रित करती है।
इससे खेत में मौजूद मित्र कीट, मधुमक्खियां और अन्य लाभकारी जीव सुरक्षित रहते हैं। जबकि रासायनिक कीटनाशक कई बार लाभकारी कीटों को भी खत्म कर देते हैं। फेरोमोन ट्रैप का प्रयोग विशेष रूप से फल छेदक, तना छेदक, फल मक्खी और अन्य उड़ने वाले कीटों के नियंत्रण में काफी प्रभावी माना जाता है।
सब्जियों, कपास, दलहनी, तिलहनी और फल वाली फसलों में इसका उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। इसे लगाने का सबसे सही समय वह माना जाता है जब फसल में फूल आना यानी फ्लावरिंग शुरू हो जाए। क्योंकि इसी समय अधिकांश हानिकारक कीट खेत में सक्रिय होने लगते हैं। यदि किसान शुरुआत में ही ट्रैप लगा दें तो कीटों की संख्या को बढ़ने से पहले ही नियंत्रित किया जा सकता है।
सामान्यतः प्रति एकड़ 5 से 7 फेरोमोन ट्रैप लगाने की सलाह दी जाती है। लेकिन यदि खेत में फल मक्खी या अन्य कीटों का प्रकोप ज्यादा दिखाई दे रहा हो तो इनकी संख्या बढ़ाकर 10 से 15 ट्रैप प्रति एकड़ तक की जा सकती है। ट्रैप को हमेशा फसल की ऊंचाई के अनुसार लगाना चाहिए ताकि कीट आसानी से उसकी ओर आकर्षित हो सकें।
इसके साथ-साथ सोलर लाइट ट्रैप भी किसानों के लिए बहुत उपयोगी तकनीक बनती जा रही है। यह एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें रात के समय रोशनी से आकर्षित होकर उड़ने वाले कीट ट्रैप में फंस जाते हैं। खास बात यह है कि इसमें बिजली का खर्च भी बहुत कम आता है क्योंकि यह सौर ऊर्जा से चलता है।
धान, सोयाबीन, कपास, मक्का और सब्जी वाली फसलों में सोलर लाइट ट्रैप का प्रयोग काफी प्रभावी माना जाता है। मानसून के समय जब कीटों का प्रकोप तेजी से बढ़ता है, तब यह तकनीक बहुत मददगार साबित होती है। किसान ध्यान रखें कि फेरोमोन ट्रैप और सोलर लाइट ट्रैप का उद्देश्य केवल कीट मारना नहीं बल्कि कीटों की संख्या को आर्थिक नुकसान स्तर से नीचे रखना होता है।
यदि इनका प्रयोग सही समय पर किया जाए तो रासायनिक दवाओं की जरूरत काफी हद तक कम की जा सकती है। आज पूरी दुनिया टिकाऊ खेती और अवशेष मुक्त उत्पादन की ओर बढ़ रही है। बाजार में भी ऐसी फसलों की मांग तेजी से बढ़ रही है जिनमें जहरीले रसायनों का प्रयोग कम हुआ हो। इसलिए जो किसान समय रहते आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल तकनीकों को अपनाएंगे, वही भविष्य की खेती में सबसे आगे रहेंगे।
क्या आपने अपने खेत में फेरोमोन ट्रैप या सोलर लाइट ट्रैप का प्रयोग किया है?
किस फसल में सबसे अच्छा परिणाम मिला?
निष्कर्ष: रासायनिक कीटनाशकों के बढ़ते खर्च और उनके दुष्प्रभावों से बचने के लिए सोलर लाइट ट्रैप और फेरोमोन ट्रैप जैसी आधुनिक व पर्यावरण-अनुकूल तकनीकें आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत हैं।
ये तकनीकें न केवल फसल को नुकसान पहुंचाने वाले हानिकारक कीटों के प्रजनन चक्र को तोड़कर उनकी संख्या नियंत्रित करती हैं, बल्कि खेत के मित्र कीटों और पर्यावरण को भी सुरक्षित रखती हैं।
शुरुआत में यानी फ्लावरिंग (फूल आने) के समय इनका सही इस्तेमाल करके किसान भाई दवाओं की लागत को काफी हद तक कम कर सकते हैं। बदलते समय के साथ सुरक्षित, कम खर्चीली और टिकाऊ खेती करने तथा बाजार में जहर-मुक्त फसलों की बढ़ती मांग का लाभ उठाने के लिए इन वैज्ञानिक तरीकों को अपनाना ही भविष्य की खेती का सही रास्ता है।
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मेरा नाम Anil Kumar Prasad है। मैं एक प्रगतिशील किसान हूं और पिछले 5 वर्षों से खेती की बारीकियों को धरातल पर सीख और समझ रहा हूं। ‘कृषि जागृति – चलो गांव की ओर’ के माध्यम से मैं अपने निजी अनुभव और खेती की सटीक जानकारी साझा करता हूं। मेरा उद्देश्य सरकारी योजनाओं, आधुनिक तकनीक और जैविक खेती के जरिए साथी किसानों को सशक्त बनाना है।
