भारत दलहन एवं अनाज एसोसिएशन (आईजीपीए) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, देश में चने की सरकारी खरीद ने अच्छी रफ़्तार पकड़ ली है। सरकारी एजेंसियों ने अब तक न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) योजना के तहत लगभग 20.5 लाख टन चने की खरीद पूरी कर ली है। इस पूरी प्रक्रिया में महाराष्ट्र सबसे बड़ा योगदानकर्ता बनकर उभरा है, जहां नाफेड और एनसीसीएफ दोनों प्रमुख एजेंसियों ने किसानों से बड़े पैमाने पर खरीदारी की है।
खरीद में भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ लिमिटेड (नाफेड) का योगदान सबसे अहम रहा है। नाफेड ने अब तक देशभर में करीब 14 लाख टन चने की खरीद की है। इस कुल मात्रा में अकेले महाराष्ट्र से 8.5 लाख टन चना शामिल है, जबकि गुजरात से 3 लाख टन और मध्य प्रदेश से 2.5 लाख टन चने की खरीद की गई है।
नाफेड के इस सक्रिय हस्तक्षेप ने इन राज्यों के किसानों को बाजार की अनिश्चितता से बचाया है। वहीं, भारतीय राष्ट्रीय उपभोक्ता सहकारी संघ (एनसीसीएफ) ने भी इस खरीद अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। एनसीसीएफ ने अब तक लगभग 6.5 लाख टन चना खरीदा है। इस एजेंसी के माध्यम से भी महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा 3 लाख टन चने की खरीद हुई है, जबकि गुजरात से 2 लाख टन और मध्य प्रदेश से 1.5 लाख टन की खरीद दर्ज की गई है।
इन दोनों एजेंसियों के माध्यम से हुई इस संगठित खरीद ने सरकारी दलहन भंडार को काफी मजबूती प्रदान की है। सरकार वर्तमान में 5,875 रुपये प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर चने की खरीद कर रही है। बाजार सूत्रों का कहना है कि मार्च के अधिकांश समय और मई के पहले पखवाड़े में खुले बाजार में चने के भाव एमएसपी से नीचे बने रहे थे।
इसी वजह से विशेष रूप से महाराष्ट्र के किसानों ने अपनी उपज बेचने के लिए सरकारी केंद्रों को प्राथमिकता दी। खुले बाजार में कमजोर कीमतों के बावजूद इस सीजन में मिली इस मजबूती ने किसानों की आय को सुरक्षित किया है।
निष्कर्ष: इस रिपोर्ट से स्पष्ट है कि खुले बाजार में चने की कीमतें न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से नीचे गिर जाने के कारण सरकारी खरीद किसानों के लिए एक बड़ा सुरक्षा कवच साबित हुई है।
नाफेड (NAFED) और एनसीसीएफ (NCCF) जैसी सरकारी एजेंसियों द्वारा 5,875 रुपये प्रति क्विंटल की दर से की गई लगभग 20.5 लाख टन चने की इस रिकॉर्ड खरीद ने न केवल किसानों को बाजार की अनिश्चितता और आर्थिक नुकसान से बचाया है, बल्कि देश के दलहन भंडार को भी मजबूत किया है।
इस पूरे अभियान में महाराष्ट्र के किसानों ने सरकारी केंद्रों पर सबसे अधिक भरोसा जताकर अपनी आय को सुरक्षित किया है, जो यह साबित करता है कि विपरीत बाजार परिस्थितियों में एमएसपी (MSP) किसानों का सबसे बड़ा सहारा है।
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