कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण ने झारखंड के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों की महिला किसानों को एक बड़ी वैश्विक कामयाबी दिलाई है। प्राधिकरण के सहयोग से महिला संचालित किसान उत्पादक कंपनियों से खरीदे गए 2 टन प्रीमियम आम्रपाली आमों को सफलतापूर्वक दुबई निर्यात किया गया है।
उच्च गुणवत्ता वाले आमों की इस खास खेप को फेयर एक्सपोर्ट्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दुबई के प्रसिद्ध लुलु स्टोर्स में खुदरा बिक्री के लिए भेजा गया है। यह पहल आदिवासी और महिला संचालित किसान समूहों के कृषि उत्पादों को सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
गुमला और देवघर की महिला FPOs से हुई आमों की खरीद
इस निर्यात के लिए आमों की खरीद पलाश-झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसायटी द्वारा प्रोत्साहित तीन प्रमुख महिला संचालित किसान उत्पादक कंपनियों से की गई है। इसमें से 1 टन आम गुमला जिले की एमवीएम बाघिमा पालकोट उत्पादक कंपनी और रायडीह एग्री उत्पादक कंपनी से खरीदे गए हैं।
शेष 1 टन आम की आपूर्ति देवघर जिले की मोहनपुर आजीविका महिला किसान उत्पादक सोसाइटी ने की है। इन आमों को आदिवासी महिला किसानों ने पूरी तरह प्राकृतिक तरीके से ‘बिरसा हरित ग्राम योजना’ के तहत अपने बागानों में विकसित किया है, जिसे मनरेगा और झारखंड सरकार के सहयोग से लागू किया गया है।
किसानों को मिला 180 फीसदी अधिक दाम, आय में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
आधिकारिक बयान के अनुसार, इस अंतरराष्ट्रीय निर्यात पहल से जुड़े किसानों को स्थानीय बाजार में मिलने वाली प्रचलित कीमतों की तुलना में करीब 180 प्रतिशत अधिक मूल्य प्राप्त हुआ है। इतनी बड़ी वित्तीय बढ़त से यह साफ हो गया है कि यदि छोटे किसानों के उत्पादों को विदेशी बाजारों तक सीधी पहुंच दी जाए, तो उनकी आय में रिकॉर्ड बढ़ोतरी की जा सकती है।
वर्तमान में प्रत्येक किसान उत्पादक कंपनी में 1,500 से अधिक अंशधारक हैं, जो संयुक्त रूप से क्षेत्र के 50,000 से अधिक किसानों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस सफल शुरुआत से भविष्य में निर्यातोन्मुख कृषि में देश की महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ने और आदिवासी किसान समुदायों के लिए बाजार के नए अवसर खुलने की उम्मीद है।
निष्कर्ष: झारखंड के ग्रामीण और आदिवासी अंचलों से निकलकर दुबई के लुलु स्टोर्स तक पहुंचना आम्रपाली आम की मिठास और हमारी महिला किसानों की कड़ी मेहनत की एक अभूतपूर्व जीत है।
यह सफलता साबित करती है कि यदि छोटे और सीमांत किसानों को सही लॉजिस्टिक्स, सरकारी सहयोग और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक सीधी पहुंच मिले, तो वे वैश्विक कृषि-व्यापार का रुख बदल सकते हैं।
‘बिरसा हरित ग्राम योजना’ और किसान उत्पादक कंपनियों (FPOs) का यह मॉडल पूरे देश के लिए एक रोल मॉडल है, जो कृषि को आत्मनिर्भर और मुनाफे का सौदा बनाने का सही रास्ता दिखाता है।
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मेरा नाम Anil Kumar Prasad है। मैं एक प्रगतिशील किसान हूं और पिछले 5 वर्षों से खेती की बारीकियों को धरातल पर सीख और समझ रहा हूं। ‘कृषि जागृति – चलो गांव की ओर’ के माध्यम से मैं अपने निजी अनुभव और खेती की सटीक जानकारी साझा करता हूं। मेरा उद्देश्य सरकारी योजनाओं, आधुनिक तकनीक और जैविक खेती के जरिए साथी किसानों को सशक्त बनाना है।
