सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2025 में भारत का वनस्पति तेल आयात साल-दर-साल 8 प्रतिशत बढ़कर 13.83 लाख टन पर पहुंच गया। यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से सोयाबीन और सूरजमुखी तेल के आयात में तेज इजाफे के कारण दर्ज की गई। दिसंबर 2024 में कुल आयात 12.75 लाख टन था, जिसमें खाद्य और गैर-खाद्य दोनों श्रेणियां शामिल थीं।
हालांकि मासिक आधार पर सुधार देखने को मिला, लेकिन चालू 2025-26 तेल वर्ष (नवंबर-अक्टूबर) के पहले दो महीनों में कुल वनस्पति तेल आयात सालाना आधार पर 12 प्रतिशत घटकर 25.67 लाख टन रह गया। यह गिरावट सीजन की शुरुआत में कमजोर खरीद को दर्शाती है।
दिसंबर में पाम तेल का आयात 20 प्रतिशत घटकर 5.07 लाख टन रह गया, जबकि एक साल पहले यह 6.32 लाख टन था। इस दौरान रिफाइंड पामोलीन का कोई आयात नहीं हुआ, जबकि कच्चे पाम तेल का आयात बढ़कर 5.03 लाख टन हो गया। पाम तेल के प्रमुख आपूर्तिकर्ता इंडोनेशिया और मलेशिया बने रहे।
इसके उलट, सूरजमुखी तेल के आयात में 32.19 प्रतिशत की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 3.49 लाख टन तक पहुंच गया। सोयाबीन तेल का आयात भी 20.23 प्रतिशत बढ़कर 5.05 लाख टन हो गया। गैर-खाद्य तेलों का आयात हालांकि तेज गिरावट के साथ घटकर 21,000 टन रह गया, जो पिछले वर्ष 45,764 टन था।
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