केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि अधिक रकबा और अनुकूल फसल परिस्थितियों के चलते देश में इस वर्ष गेहूं का उत्पादन पिछले साल के रिकॉर्ड 1179 लाख टन से भी अधिक रहने की संभावना है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद यानी आईसीएआर के एक कार्यक्रम के इतर बातचीत में उन्होंने बताया कि फिलहाल फसल की स्थिति अच्छी है और किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है।
आईसीएआर के महानिदेशक एम. एल. जाट ने कहा कि गेहूं का रकबा 320 लाख हेक्टेयर से अधिक हो चुका है और फसल की हालत मजबूत बनी हुई है। यदि मौसम अनुकूल रहा, तो उत्पादन करीब 12 करोड़ टन तक पहुंच सकता है। उन्होंने इस सकारात्मक अनुमान का श्रेय समय पर और जल्दी बुवाई को दिया।
कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 रबी सीजन में 2 जनवरी तक गेहूं की बुवाई रिकॉर्ड 334 लाख हेक्टेयर में की जा चुकी है, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि के 328 लाख हेक्टेयर से अधिक है। कुल रकबे का 73 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा जलवायु-सहिष्णु और जैव-सुदृढ़ बीज किस्मों से बोया गया है, जो मौसम की अनिश्चितताओं से निपटने में सक्षम मानी जाती हैं।
गौरतलब है कि देश भर के प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में रबी गेहूं की बुवाई लगभग पूरी हो चुकी है और इसकी कटाई मार्च से शुरू होने की उम्मीद है। उल्लेखनीय है कि भारत, चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक देश है।
12 करोड़ टन का उत्पादन सिर्फ एक नंबर नहीं है, यह हमारे किसानों के पसीने और आधुनिक विज्ञान की जीत है। अगर हम इसी तरह तकनीक और सही नीतियों का इस्तेमाल करते रहे, तो भारत बहुत जल्द कृषि क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व करेगा।
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