अंबिका आम: सघन बागवानी और बंपर कमाई के लिए बेहतरीन किस्म, जानें CISH लखनऊ की खास विशेषताएं

आपने अक्सर हरे, पीले और लाल रंग के आम तो देखे होंगे, लेकिन क्या आपने कभी ऐसा आम देखा है जो सिर्फ स्वाद के लिए ही नहीं बल्कि अपने पोषण गुणों के कारण भी खास पहचान रखता हो? आज हम बात कर रहे हैं अंबिका आम की, जिसे केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान (CISH), लखनऊ द्वारा विकसित किया गया है। यह केवल एक नई किस्म नहीं, बल्कि सघन बागवानी, बेहतर गुणवत्ता और व्यावसायिक खेती की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जाती है।

अंबिका आम के पोषण गुण और स्वाद: विटामिन A से भरपूर

अंबिका आम की सबसे बड़ी विशेषता इसका आकर्षक रंग, संतुलित मिठास और बेहतर पोषण गुणवत्ता है। शोध के अनुसार इस किस्म में विटामिन A की मात्रा अपेक्षाकृत अधिक पाई जाती है। विटामिन A आंखों की रोशनी, रोग प्रतिरोधक क्षमता और त्वचा के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण पोषक तत्व है।

इसके अलावा इस किस्म में कैरोटेनॉयड जैसे प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट भी अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं। कई वैज्ञानिक अध्ययनों में यह बताया गया है कि आम में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट शरीर की कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, यह कहना वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं होगा कि केवल इस आम को खाने से कैंसर जैसी बीमारी से बचाव या उपचार निश्चित रूप से हो जाता है। इसे संतुलित और पौष्टिक आहार का एक लाभकारी हिस्सा माना जा सकता है।

स्वाद की बात करें तो अंबिका आम मध्यम मीठा होता है। जिन लोगों को बहुत अधिक मीठे आम पसंद नहीं हैं, उनके लिए यह एक अच्छा विकल्प हो सकता है। यदि किसी व्यक्ति को मधुमेह (डायबिटीज) है, तो वह भी चिकित्सक या पोषण विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार सीमित मात्रा में इस आम का सेवन कर सकता है। किसी भी आम की तरह इसमें भी प्राकृतिक शर्करा होती है, इसलिए मधुमेह रोगियों को नियंत्रित मात्रा में ही इसका सेवन करना चाहिए।

क्रास ब्रीडिंग का कमाल: जनार्दन पसंद और आम्रपाली का संकरण

अंबिका एक संकर (Hybrid) किस्म है। इसे दो उत्कृष्ट किस्मों के संकरण से विकसित किया गया है। पहली किस्म दक्षिण भारत की प्रसिद्ध रंगीन किस्म जनार्दन पसंद और दूसरी पूर्वी उत्तर प्रदेश में अत्यधिक लोकप्रिय अमरपाली है।

इन दोनों की श्रेष्ठ विशेषताओं को मिलाकर वैज्ञानिकों ने अंबिका का विकास किया। इस किस्म को वर्ष 2000 में केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान (CISH), लखनऊ द्वारा जारी किया गया।

सघन बागवानी (High Density Plantation) के लिए सबसे उपयुक्त

यह किस्म विशेष रूप से सघन बागवानी (High Density Plantation) के लिए उपयुक्त मानी जाती है। सामान्य आम के बागों की तुलना में इसे 3×3 मीटर या 4×4 मीटर की दूरी पर लगाया जा सकता है।

इससे प्रति हेक्टेयर अधिक पौधे लगाए जा सकते हैं और भूमि का बेहतर उपयोग होता है। छोटे आकार की नियंत्रित छत्र (Canopy) होने के कारण इसकी छंटाई, कीट एवं रोग प्रबंधन, फल तुड़ाई तथा अन्य बागवानी कार्य अपेक्षाकृत आसान हो जाते हैं। यही कारण है कि सीमित भूमि वाले किसान भी इस किस्म से अच्छी आय प्राप्त कर सकते हैं।

अंबिका का पेड़ मध्यम वृद्धि वाला होता है और इसकी शाखाएं संतुलित रूप से फैलती हैं। फल आकर्षक रंग के होते हैं, जिससे बाजार में इनकी मांग बढ़ जाती है। अच्छी गुणवत्ता, रंग और आकार के कारण यह स्थानीय बाजारों के साथ-साथ प्रीमियम फल बाजार में भी अच्छी कीमत प्राप्त करने की क्षमता रखता है।

अंबिका आम के पौधे कहाँ से खरीदें और क्या है कीमत?

यदि किसान अंबिका की व्यावसायिक खेती करना चाहते हैं, तो सबसे महत्वपूर्ण बात है कि प्रमाणित और मूल पौधे ही खरीदें। सरकारी नर्सरियों और उद्यान विभाग से मिलने वाले पौधे गुणवत्ता की दृष्टि से अधिक विश्वसनीय होते हैं।

जानकारी के अनुसार, लखनऊ के मलिहाबाद स्थित उद्यान प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र, बस्ती क्षेत्र की सरकारी पौधशालाएं तथा अन्य अधिकृत सरकारी नर्सरियों से अंबिका के पौधे उपलब्ध कराए जाते हैं। इनकी कीमत सामान्यतः ₹122 से ₹150 प्रति पौधा के बीच रहती है, जो निजी नर्सरियों की तुलना में काफी किफायती है।

रंगीन आमों की बाजार में मांग और मुनाफा

आज के समय में रंगीन आमों की मांग लगातार बढ़ रही है। अंबिका के अलावा पूसा लालिमा और विदेशी किस्म टॉमी एटकिंस जैसे आम भी बाजार में अच्छी कीमत पर बिकते हैं। कई प्रीमियम बाजारों में इन किस्मों के फल ₹100 से ₹200 प्रति फल तक भी बिकते देखे गए हैं। वास्तविक कीमत गुणवत्ता, आकार, बाजार और मांग के अनुसार बदल सकती है। इसलिए यदि किसान उच्च गुणवत्ता का उत्पादन कर सकें तो उन्हें सामान्य किस्मों की तुलना में बेहतर लाभ मिलने की संभावना रहती है।

अंबिका आम के बाग प्रबंधन और देखभाल के तरीके

अंबिका की सफल खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली दोमट भूमि सबसे उपयुक्त मानी जाती है। खेत में पौधारोपण से पहले पर्याप्त मात्रा में सड़ी हुई गोबर की खाद, जैविक खाद और आवश्यकता अनुसार उर्वरकों का प्रयोग करना चाहिए। पौधों की नियमित सिंचाई, समय-समय पर छंटाई, संतुलित पोषण प्रबंधन तथा कीट एवं रोगों की निगरानी आवश्यक है। इससे पौधों की वृद्धि अच्छी होती है और गुणवत्तापूर्ण फल प्राप्त होते हैं।

निष्कर्ष: यदि आप नया आम का बाग लगाने की योजना बना रहे हैं और कम क्षेत्र में अधिक उत्पादन चाहते हैं, तो अंबिका आपके लिए एक अच्छा विकल्प हो सकता है। सरकारी संस्थानों द्वारा विकसित यह किस्म वैज्ञानिक अनुसंधान का परिणाम है और आधुनिक बागवानी तकनीकों के साथ बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता रखती है। प्रमाणित पौधों का चयन करें, वैज्ञानिक सलाह के अनुसार बाग तैयार करें और सघन बागवानी अपनाकर अपनी आय बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ाएं।

Frequently Asked Questions (FAQ)

Q. अंबिका आम (Ambika Mango) को किस संस्थान ने विकसित किया है और यह किन किस्मों का संकर (Hybrid) है?

Ans. अंबिका आम को केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान (CISH), लखनऊ द्वारा विकसित किया गया है। यह दक्षिण भारत की ‘जनार्दन पसंद’ और उत्तर भारत की ‘आम्रपाली’ किस्म के संकरण से तैयार की गई हाइब्रिड किस्म है।

Q. अंबिका आम को सघन बागवानी (High Density Plantation) में कितनी दूरी पर लगाया जाता है?

Ans. अंबिका आम के पौधों को सघन बागवानी के तहत 3×3 मीटर या 4×4 मीटर की दूरी पर लगाया जा सकता है, जिससे सीमित भूमि में अधिक पौधे लगाए जा सकते हैं।

Q. सरकारी नर्सरियों में अंबिका आम के पौधे की अनुमानित कीमत क्या है?

Ans. उद्यान विभाग और अधिकृत सरकारी नर्सरियों (जैसे CISH लखनऊ व राजकीय पौधशालाओं) में अंबिका आम के प्रमाणित पौधे सामान्यतः ₹122 से ₹150 प्रति पौधा की दर से उपलब्ध होते हैं।

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