कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अनुसार, दिसंबर तिमाही के दौरान भारत का कपास आयात सालाना आधार पर 158 प्रतिशत उछलकर रिकॉर्ड 31 लाख गांठ तक पहुँच गया। यह तेज़ बढ़ोतरी सरकार द्वारा कपास पर 11 प्रतिशत आयात शुल्क को अस्थायी रूप से हटाने के फैसले के बाद दर्ज की गई।
गौरतलब है कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कपास उत्पादक देश है। भारत के कपास आयात में आई इस वृद्धि से वैश्विक कपास कीमतों को सहारा मिलने की संभावना है, जबकि घरेलू बाजार में कीमतों पर दबाव कुछ कम हो सकता है, जो इससे पहले फसल नुकसान के कारण मजबूत बनी हुई थीं। उद्योग के अनुसार, शुल्क-मुक्त आयात ने स्पिनिंग मिलों के लिए कच्चे माल की उपलब्धता आसान की है।
सीएआई का अनुमान है कि 1 अक्टूबर से शुरू हुए 2025-26 विपणन वर्ष में भारत का कपास आयात 22 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 50 लाख गांठ तक पहुँच सकता है। यह पिछले वर्ष के 41 लाख गांठ के आयात से अधिक होगा। आयात का बड़ा हिस्सा संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्राज़ील, ऑस्ट्रेलिया और विभिन्न अफ्रीकी देशों से आने की संभावना है।
बाजार के जानकारों का कहना है कि आने वाले महीनों में कीमतों में 2 से 4 प्रतिशत तक का करेक्शन देखा जा सकता है। हालांकि, यह बहुत कुछ इस बात पर भी निर्भर करेगा कि अमेरिका और चीन जैसे बड़े देशों में कपास की पैदावार कैसी रहती है।
दिसंबर तिमाही के ये आंकड़े बताते हैं कि भारतीय कॉटन मार्केट अब एक संतुलन की ओर बढ़ रहा है। जहां इंडस्ट्री को राहत मिल रही है, वहीं हमें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि हमारे किसानों के हितों की रक्षा हो।
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