भारतीय सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन (एसईए) के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2026) में भारत का कुल तेलखली निर्यात सालाना आधार पर 13 प्रतिशत घटकर 9,57,224 टन रह गया है। जून 2026 के दौरान मासिक निर्यात भी 31 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2,17,757 टन पर आ गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में 3,13,404 टन दर्ज किया गया था।
सोयाबीन खली निर्यात में 66% की भारी गिरावट
कुल निर्यात में आई इस गिरावट की मुख्य वजह सोयाबीन खली के निर्यात में हुई 66 प्रतिशत की भारी कमी रही, जो घटकर 1,69,502 टन रह गया। अर्जेंटीना और ब्राजील जैसे दक्षिण अमेरिकी उत्पादक देशों की तुलना में भारतीय सोयाबीन खली के भाव ऊंचे रहने से वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा घटी है। इसके अलावा, घरेलू बाजार में सोयाबीन की ऊंची कीमतों और देशी पशुधन व पशु आहार क्षेत्र की मजबूत मांग के कारण भी निर्यात के लिए उपलब्ध मात्रा सीमित रही।
चीन और बांग्लादेश बने शीर्ष आयातक
वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में लाल सागर के लगातार जारी जहाजरानी व्यवधानों और ऊंचे मालभाड़े ने निर्यात से मिलने वाले मुनाफे को प्रभावित किया। हालांकि, इन चुनौतियों के बीच चीन, बांग्लादेश और वियतनाम भारतीय तेलखली के शीर्ष आयातक बने रहे। आलोच्य तिमाही में चीन ने 3,13,384 टन और बांग्लादेश ने 1,43,013 टन तेलखली की खरीद की, जो दोनों देशों के लिए पिछले वर्ष के आयात आंकड़ों से अधिक है।
निष्कर्ष: भारत के तेलखली निर्यात में आई यह गिरावट स्पष्ट संकेत देती है कि केवल घरेलू उत्पादन ही नहीं, बल्कि वैश्विक बाजार की मूल्य प्रतिस्पर्धा और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी चुनौतियां भी हमारे कृषि व्यापार को सीधे प्रभावित करती हैं।
ब्राजील और अर्जेंटीना से मिल रही कड़ी प्रतिस्पर्धा और लाल सागर के बढ़े मालभाड़े के बीच घरेलू मांग का मजबूत रहना भले ही स्थानीय स्तर पर कीमतों को सहारा दे रहा हो, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय उत्पादों की हिस्सेदारी बनाए रखने के लिए नीतिगत प्रोत्साहन और फ्रेट सब्सिडी जैसे कदमों की तत्काल आवश्यकता है।
आने वाले समय में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के स्थिर होने और नई खरीफ फसलों की आवक के बाद ही तेलखली निर्यात में सुधार और किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीद की जा सकती है।
Frequently Asked Questions (FAQ)
Q1. वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत का तेलखली निर्यात कितना रहा?
उत्तर: एसईए (SEA) के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल-जून 2026 तिमाही में भारत का कुल तेलखली निर्यात 9,57,224 टन रहा, जो पिछले साल की समान अवधि से 13% कम है।
Q2. सोयाबीन खली के निर्यात में कितनी गिरावट आई है?
उत्तर: सोयाबीन खली (Soybean Meal/DOC) के निर्यात में सालाना आधार पर 66 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है, जो घटकर 1,69,502 टन रह गया।
Q3. भारतीय सोयाबीन खली वैश्विक बाजार में क्यों पिछड़ रही है?
उत्तर: ब्राजील और अर्जेंटीना जैसे दक्षिण अमेरिकी देशों की सोयाबीन खली के अंतरराष्ट्रीय भाव भारतीय उत्पाद से काफी सस्ते हैं, साथ ही घरेलू बाजार में सोयाबीन की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं।
Q4. भारतीय तेलखली के सबसे बड़े आयातक देश कौन से रहे?
उत्तर: इस अवधि में चीन 3,13,384 टन के साथ शीर्ष खरीदार रहा, इसके बाद बांग्लादेश (1,43,013 टन) और वियतनाम प्रमुख खरीदार रहे।
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