पंजाब-हरियाणा के धान किसानों को कार्बन क्रेडिट से अतिरिक्त आय, 2,500 से ज्यादा किसानों को भुगतान

पंजाब और हरियाणा के 2,500 से अधिक छोटे और सीमांत धान किसानों को पर्यावरण अनुकूल खेती अपनाने के लिए पहली बार कार्बन क्रेडिट का भुगतान किया जा रहा है। किसानों ने वर्ष 2019 से 2022 के दौरान धान की सीधी बुवाई, कम जुताई और फसल अवशेष प्रबंधन जैसी टिकाऊ तकनीकों को अपनाया था, जिससे ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने, मिट्टी में जैविक कार्बन बढ़ाने और जल संरक्षण में अभूतपूर्व सफलता मिली है।

इंडिगो का कार्यक्रम: 2,500 किसानों को ₹15,000 तक की प्रोत्साहन राशि

यह कार्यक्रम कृषि सेवा संस्थान ग्रो इंडिगो द्वारा संचालित किया जा रहा है। संस्थान के अनुसार, लगभग 30,000 एकड़ कृषि क्षेत्र से 50,000 से अधिक कार्बन क्रेडिट तैयार किए गए हैं। अधिकांश पात्र किसानों को 3,000 रुपये से लेकर 15,000 रुपये तक की प्रोत्साहन राशि सीधे उनके बैंक खातों में डिजिटल माध्यम से भेजी जा रही है। जारी किए गए इन शुरुआती कार्बन क्रेडिट्स का सत्यापन अंतरराष्ट्रीय मानक ‘वेरा कार्बन स्टैंडर्ड’ के तहत ऑडिट करके किया गया है।

सीधी बुवाई से प्रति हेक्टेयर 14 लाख लीटर पानी की बचत

पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से, पारंपरिक विधि की तुलना में धान की सीधी बुवाई तकनीक से प्रति हेक्टेयर 14 लाख लीटर तक पानी की बचत दर्ज की गई है। इसके अतिरिक्त, खेतों में पराली और फसल अवशेष जलाने की घटनाओं में आई कमी से वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण मदद मिली है।

वर्ष 2027 तक 10 लाख एकड़ और 1 लाख किसानों को जोड़ने का लक्ष्य

इससे वायु गुणवत्ता में सुधार के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरा शक्ति को भी संबल मिला है। ग्रो इंडिगो का लक्ष्य वर्ष 2027 तक प्रतिवर्ष 10 लाख कार्बन क्रेडिट तैयार करना है। वर्तमान में यह संस्थान पंजाब और हरियाणा के 10 लाख एकड़ से अधिक कृषि क्षेत्र में 1,00,000 से अधिक किसानों के साथ मिलकर टिकाऊ एवं पर्यावरण-अनुकूल कृषि पद्धतियों के विस्तार पर कार्य कर रहा है।

निष्कर्ष: धान की खेती में कार्बन क्रेडिट से नकद भुगतान की यह शुरुआत भारतीय कृषि के लिए एक युगांतरकारी बदलाव है, जो यह साबित करती है कि पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आमदनी में वृद्धि एक साथ संभव है। भूजल दोहन और पराली प्रदूषण से जूझ रहे पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में बिना लागत बढ़ाए प्रति हेक्टेयर 14 लाख लीटर पानी बचाना और अतिरिक्त आय कमाना किसानों के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन है।

आने वाले समय में जैसे-जैसे कार्बन फार्मिंग का दायरा बढ़ेगा, यह मॉडल न केवल रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटाएगा, बल्कि जलवायु संकट के दौर में अन्नदाता को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने का मजबूत माध्यम सिद्ध होगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1. धान की खेती में कार्बन क्रेडिट से किसानों को कितनी अतिरिक्त आय मिल रही है?

उत्तर: पंजाब और हरियाणा के पात्र किसानों को उनकी कृषि पद्धति और क्षेत्र के आधार पर 3,000 रुपये से लेकर 15,000 रुपये तक की प्रोत्साहन राशि सीधे बैंक खातों में दी जा रही है।

Q2. किन तकनीकों को अपनाने पर किसानों को यह कार्बन क्रेडिट मिला है?

उत्तर: धान की सीधी बुवाई (DSR), कम जुताई (Zero/Minimum Tillage) और पराली न जलाकर उसका खेत में ही वैज्ञानिक प्रबंधन करने पर यह क्रेडिट दिया गया है।

Q3. कार्बन क्रेडिट का सत्यापन किसने किया है?

उत्तर: इस कार्यक्रम के तहत तैयार 50,000 से अधिक कार्बन क्रेडिट्स का ऑडिट और सत्यापन अंतरराष्ट्रीय मानक ‘वेरा कार्बन स्टैंडर्ड’ (Verra) द्वारा किया गया है।

Q4. सीधी बुवाई से पानी की कितनी बचत दर्ज की गई है?

उत्तर: पारंपरिक धान रोपाई की तुलना में सीधी बुवाई तकनीक से प्रति हेक्टेयर लगभग 14 लाख लीटर पानी की बचत दर्ज की गई है।

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