उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल ने मथुरा जिले के छाता क्षेत्र में पिछले 19 वर्षों से बंद पड़ी चीनी मिल के परिसर में एक आधुनिक एथेनॉल संयंत्र स्थापित करने के प्रस्ताव को प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान कर दी है। गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण के अनुसार, इस बहुआयामी परियोजना की अनुमानित निर्माण लागत 200 करोड़ रुपये से अधिक होगी।
वार्षिक 3.96 करोड़ लीटर क्षमता: मक्का और धान से भी बनेगा एथेनॉल
इस प्रस्तावित संयंत्र की वार्षिक एथेनॉल उत्पादन क्षमता 3.96 करोड़ लीटर निर्धारित की गई है तथा इसका संचालन वर्ष में 11 महीने किया जाएगा। संयंत्र में एथेनॉल निर्माण के लिए प्राथमिक रूप से गन्ने का उपयोग किया जाएगा, जबकि गन्ने की उपलब्धता घटने पर मक्का और धान को वैकल्पिक कच्चे माल के रूप में प्रयोग में लाया जाएगा।
एकड़ परिसर और जेवर एयरपोर्ट कार्गो से बेहतरीन लॉजिस्टिक कनेक्टिविटी
परियोजना के लिए लगभग 96 एकड़ भूमि उपलब्ध कराई गई है, जिसमें एथेनॉल संयंत्र के साथ-साथ विशाल गोदामों और संबंधित सहायक परिसरों का निर्माण किया जाएगा। राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित होने और जेवर में निर्माणाधीन नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के मालवाहक टर्मिनल से निकटता के कारण इस परियोजना को लॉजिस्टिक का बड़ा लाभ मिलेगा, जिससे क्षेत्र में रोजगार के कई नए अवसर पैदा होंगे।
सालाना 50 लाख क्विंटल गन्ने की खपत: किसानों को मिलेगा त्वरित भुगतान
संयंत्र के सुचारू संचालन के लिए प्रतिवर्ष लगभग 45 से 50 लाख क्विंटल गन्ने की आवश्यकता होगी, जिससे क्षेत्रीय किसानों को अपनी फसल का उचित एवं त्वरित बाजार मूल्य मिल सकेगा। उल्लेखनीय है कि स्थानीय किसानों की सुविधा और गन्ने की आपूर्ति बनाए रखने के लिए छाता क्षेत्र में तीन गन्ना क्रय केंद्र पहले से ही संचालित किए जा रहे हैं।
निष्कर्ष: मथुरा के छाता में 19 वर्षों से बंद पड़ी चीनी मिल को आधुनिक एथेनॉल संयंत्र में बदलने का उत्तर प्रदेश सरकार का यह निर्णय ब्रज क्षेत्र की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा बदलाव साबित होगा। 200 करोड़ रुपये के निवेश से न केवल बंजर पड़ी 96 एकड़ औद्योगिक भूमि का सदुपयोग होगा।
बल्कि सालाना 50 लाख क्विंटल गन्ने की मांग से स्थानीय किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए दूर-दराज की मिलों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इसके अलावा, मक्का और धान को भी कच्चे माल के रूप में शामिल करना फसल विविधीकरण को बढ़ावा देगा और जेवर एयरपोर्ट की निकटता इस पूरे क्षेत्र को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एक प्रमुख एग्री-लॉजिस्टिक्स हब के रूप में स्थापित करेगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1. छाता एथेनॉल संयंत्र की अनुमानित लागत और क्षमता कितनी है?
उत्तर: इस परियोजना की अनुमानित निर्माण लागत 200 करोड़ रुपये से अधिक है और इसकी वार्षिक एथेनॉल उत्पादन क्षमता 3.96 करोड़ लीटर तय की गई है।
Q2. संयंत्र में एथेनॉल बनाने के लिए किन फसलों का उपयोग होगा?
उत्तर: प्राथमिक रूप से गन्ने के रस व शीरे का उपयोग होगा, जबकि गन्ने की अनुपलब्धता के समय मक्का और धान को वैकल्पिक कच्चे माल के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा।
Q3. इस संयंत्र से स्थानीय किसानों को क्या फायदा होगा?
उत्तर: हर साल करीब 45 से 50 लाख क्विंटल गन्ने की खपत होगी, जिससे किसानों को मिल गेट पर ही पारदर्शी तौल और समय पर भुगतान की सुविधा मिलेगी।
Q4. यह चीनी मिल कितने वर्षों से बंद पड़ी थी?
उत्तर: मथुरा के छाता की यह सहकारी चीनी मिल पिछले 19 वर्षों से बंद पड़ी थी, जिसे अब एथेनॉल कॉम्प्लेक्स के रूप में पुनर्जीवित किया जा रहा है।
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