हरियाणा की कृषि उपज मंडियों में धान की अगेती बासमती किस्मों की आवक में तेजी आने के कारण किसानों को कीमतों में गिरावट का सामना करना पड़ रहा है। पिछले एक सप्ताह के भीतर पूसा 1509 और पूसा 1692 जैसी लोकप्रिय किस्मों के बाजार भाव 500 से 700 रुपये प्रति क्विंटल तक गिरकर 3,500 से 3,700 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर आ गए हैं।
आवक और मांग में असंतुलन: सीमित खरीद से खरीदारों का दबदबा
इस महीने की शुरुआत में ये किस्में करीब 4,200 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर बिक रही थीं। कीमतों में आई इस कमी से किसानों को प्रति एकड़ लगभग 10,000 से 12,000 रुपये का वित्तीय नुकसान होने का अनुमान जताया गया है। व्यापारियों और किसान प्रतिनिधियों के अनुसार, मंडियों में धान की आवक जिस तेज गति से बढ़ रही है। उसकी तुलना में व्यावसायिक खरीद की गति धीमी बनी हुई है। बाजार में तत्काल आवश्यकता के अनुसार ही सीमित खरीदारी की जा रही है और आक्रामक मांग का अभाव है।
आवक और मांग के इस असंतुलन से खरीदारों की मोलभाव करने की क्षमता मजबूत हुई है। कम अवधि में पककर तैयार होने वाली पूसा 1509 जैसी किस्में किसानों के बीच काफी प्रचलित हैं, हालांकि मंडियों में नमी की मात्रा, दाने की लंबाई और मिलिंग रिकवरी जैसे गुणवत्ता मानकों के आधार पर ही वास्तविक दरें तय हो रही हैं तथा उच्च गुणवत्ता वाले धान को प्रीमियम मूल्य मिल रहा है।
आवक और मांग में असंतुलन: सीमित खरीद से खरीदारों का दबदबा
राज्य के प्रमुख बासमती उत्पादक जिलों करनाल, कुरुक्षेत्र, कैथल, अंबाला, यमुनानगर, सिरसा और फतेहाबाद की मंडियों में अगेती किस्मों की आवक लगातार जारी है। कारोबारियों का मानना है कि यदि मांग की तुलना में आपूर्ति अधिक बनी रही तो कीमतों पर अल्पकालिक दबाव जारी रह सकता है, परंतु इसे दीर्घकालिक मंदी मानना जल्दबाजी होगी। आने वाले हफ्तों में घरेलू मिलिंग उद्योग की मांग और अंतरराष्ट्रीय बाजार से मिलने वाले नए निर्यात ऑर्डर बासमती की भावी मूल्य दिशा निर्धारित करेंगे।
गत वर्ष से बेहतर स्थिति: निर्यात मांग पर टिकी भविष्य की दरें
उल्लेखनीय है कि कीमतों में हालिया गिरावट के बावजूद मौजूदा भाव पिछले वर्ष की समान अवधि में दर्ज 3,000 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर से ऊपर बने हुए हैं। आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के दौरान बासमती चावल की कीमतों में सालाना आधार पर 15 से 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी, जिससे बाजार में आधारभूत मजबूती बनी हुई है।
निष्कर्ष: हरियाणा की मंडियों में पूसा 1509 और 1692 किस्मों के भाव में आई यह गिरावट तात्कालिक तौर पर भारी आवक और सुस्त लिवाली के कारण है। यद्यपि मौजूदा कीमतें पिछले वर्ष के ₹3,000 प्रति क्विंटल के स्तर से अभी भी ऊपर बनी हुई हैं और चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में बासमती में 15 से 20 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज हुई थी, फिर भी नए विपणन सत्र में किसानों को प्रति एकड़ ₹12,000 तक का नुकसान उनकी आय पर भारी पड़ रहा है।
आने वाले हफ्तों में घरेलू मिलों की पूरी क्षमता से खरीद शुरू होने और खाड़ी देशों से नए निर्यात ऑर्डर मिलने के बाद ही कीमतों में सुधार की वास्तविक उम्मीद की जा सकती है; तब तक किसानों को अपनी उपज अच्छी तरह सुखाकर और साफ करके ही मंडी लाने की सलाह है ताकि उन्हें गुणवत्ता का प्रीमियम भाव मिल सके।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1. हरियाणा की मंडियों में पूसा 1509 और 1692 के वर्तमान भाव क्या हैं?
उत्तर: वर्तमान में पूसा 1509 और 1692 किस्मों के भाव 3,500 से 3,700 रुपये प्रति क्विंटल के बीच चल रहे हैं, जबकि महीने की शुरुआत में यह 4,200 रुपये प्रति क्विंटल तक थे।
Q2. धान की कीमतों में हालिया गिरावट का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर: मंडियों में अगेती धान की भारी आवक के मुकाबले व्यापारियों और राइस मिलर्स द्वारा सीमित व धीमी खरीद को कीमतों में गिरावट की मुख्य वजह माना जा रहा है।
Q3. इस मूल्य गिरावट से किसानों को कितना वित्तीय नुकसान हो रहा है?
उत्तर: भाव में 500 से 700 रुपये प्रति क्विंटल की कमी आने से किसानों को प्रति एकड़ लगभग 10,000 से 12,000 रुपये का घाटा होने का अनुमान है।
Q4. किन जिलों की मंडियों में आवक का सबसे अधिक दबाव है?
उत्तर: करनाल, कुरुक्षेत्र, कैथल, अंबाला, यमुनानगर, सिरसा और फतेहाबाद जिलों की अनाज मंडियों में अगेती किस्मों की आवक सबसे ज्यादा दर्ज की जा रही है।
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