मजबूत त्योहारी मांग और सीमित आपूर्ति से चने की कीमतों में तेजी, ऑस्ट्रेलिया में उत्पादन 52% घटा

भारत दलहन एवं अनाज संघ (आयपीजीए) की साप्ताहिक रिपोर्ट के अनुसार, मजबूत त्योहारी मांग, सीमित घरेलू आपूर्ति और आगामी रबी फसल की बुवाई को लेकर बनी चिंताओं के कारण निकट अवधि में चने की कीमतों में मजबूती बनी रहने की प्रबल संभावना है। पर्व-त्योहारों के चलते देश में चना दाल और बेसन की खपत में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

त्योहारी मांग से चना दाल और बेसन की खपत में जोरदार उछाल

इन दोनों उत्पादों के उच्च बाजार भाव ने मिलर्स और व्यापारियों में नई खरीदारी के प्रति रुचि बढ़ाई है, जिससे शनिवार को समाप्त हुए सप्ताह में चने के दरों में तेजी दर्ज की गई। भारत के सबसे बड़े चना आपूर्तिकर्ता देश ऑस्ट्रेलिया में इस वर्ष कुल उत्पादन 10 लाख टन से थोड़ा अधिक रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 52 प्रतिशत कम है।

ऑस्ट्रेलिया में उत्पादन 52% घटा: नवंबर से पहले नई खेप की उम्मीद नहीं

ऑस्ट्रेलिया की नई फसल नवंबर से पहले भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने की संभावना नहीं है, जिससे निकट से मध्यम अवधि में आयातित चना महंगा ही बना रहेगा। इस बीच, देश के प्रमुख चना उत्पादक राज्यों में मानसूनी बारिश सामान्य से कम रहने के कारण आगामी रबी सीजन की बुवाई को लेकर अनिश्चितता गहरी हो गई है। मिट्टी में पर्याप्त नमी की कमी और सीमित सिंचाई सुविधाओं से चने के आच्छादन क्षेत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

कमजोर बारिश से आगामी रबी बुवाई और फसल रकबे पर संकट

हालांकि, केंद्र सरकार अपने सुरक्षित बफर स्टॉक से लगातार बाजार में चना जारी कर रही है, परंतु बेची जा रही मात्रा सीमित है और इसके दाम मोटे तौर पर हाजिर बाजार के भाव के लगभग समकक्ष बने हुए हैं। आयपीजीए के अनुसार, आने वाले दिनों में बाजार की भावी दिशा सरकार द्वारा की जाने वाली चना बिक्री और मूल्य नियंत्रण के उपायों पर टिकी रहेगी।

निष्कर्ष: त्योहारी सीजन में बेसन और दाल मिलों की मजबूत खरीदारी, ऑस्ट्रेलिया में 52% उत्पादन गिरावट के चलते आयात का महंगा होना और प्रमुख उत्पादक राज्यों में मानसूनी बारिश की कमी से रबी बुवाई को लेकर उपजी चिंताओं ने मिलकर चने के बाजार को ठोस सहारा दिया है।

हालांकि केंद्र सरकार अपने सुरक्षित बफर स्टॉक से बाजार में हस्तक्षेप कर रही है, परंतु सीमित आपूर्ति और ऊंची लागत के बीच कीमतों में किसी बड़ी गिरावट की संभावना क्षीण नजर आती है। आने वाले सप्ताहों में रबी बुवाई की वास्तविक प्रगति और सरकारी बिक्री की गति ही चने की भावी दिशा तय करेगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1. त्योहारी सीजन में चने की कीमतों में मजबूती का मुख्य कारण क्या है?

उत्तर: त्योहारी सीजन में चना दाल और बेसन की भारी मांग, कमजोर घरेलू आपूर्ति तथा आयातित चने की धीमी आवक इसका मुख्य कारण है।

Q2. ऑस्ट्रेलिया से चना आयात की क्या स्थिति है?

उत्तर: ऑस्ट्रेलिया में इस वर्ष उत्पादन 52 प्रतिशत घटकर करीब 10 लाख टन रहने का अनुमान है और वहां की नई फसल नवंबर से पहले भारत नहीं आ सकेगी।

Q3. आगामी रबी सीजन में चने की बुवाई को लेकर क्या चिंताएं हैं?

उत्तर: प्रमुख दलहन उत्पादक राज्यों में मानसूनी बारिश सामान्य से कम रहने से खेतों में नमी की कमी है, जिससे चने के बुवाई रकबे पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है।

Q4. क्या सरकारी बफर स्टॉक से कीमतों पर दबाव बनेगा?

उत्तर: सरकार द्वारा बाजार में जारी चने की मात्रा सीमित है और इसके दाम हाजिर बाजार के लगभग समान हैं, इसलिए फिलहाल बड़ी मंदी की संभावना नहीं दिखती।

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