महाराष्ट्र-मध्य प्रदेश में हर साल ₹2,711 करोड़ का प्याज बर्बाद

महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के किसानों को हर साल रबी प्याज के भंडारण और रख-रखाव के दौरान लगभग 16.9 लाख मीट्रिक टन उपज गंवानी पड़ती है। ‘वर्ल्ड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट इंडिया’ (WRI India) के हालिया अध्ययन के अनुसार, इस फसल-पश्चात क्षति (Post-Harvest Loss) का कुल आर्थिक मूल्य ₹2,711 करोड़ आंका गया है। यदि वैज्ञानिक क्योरिंग (Curing) और आधुनिक भंडारण व्यवस्था अपनाई जाए, तो न केवल किसानों की जेब में यह भारी रकम बचेगी, बल्कि 10 लाख टन ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन भी रुकेगा। जानिए प्याज, सोयाबीन और सीताफल को सड़ने से बचाने के वैज्ञानिक उपाय।

16.9 लाख टन प्याज की बर्बादी और आर्थिक नुकसान

मध्य प्रदेश-महाराष्ट्र के किसानों को प्रतिवर्ष प्याज के भंडारण के दौरान लगभग 16.9 लाख टन उपज का नुकसान उठाना पड़ता है। वर्ल्ड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट इंडिया की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार इस फसल-पश्चात क्षति का कुल आर्थिक मूल्य 2,711 करोड़ रुपय आंका गया है। भंडारण एवं आपूर्ति श्रृंखला के स्तर पर होने वाले इस नुकसान को नियंत्रित करने से जहाँ किसानों की आय सुरक्षित होगी, वहीं लगभग 10 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड समकक्ष ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को रोकने में भी सहायता मिलेगी।

सोयाबीन, सीताफल और प्याज का संयुक्त अध्ययन

रिपोर्ट में महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के प्रमुख उत्पादक जिलों में प्याज, सोयाबीन तथा सीताफल की कटाई, छंटाई, परिवहन, भंडारण और रख-रखाव के विभिन्न चरणों में होने वाले नुकसान का गहन अध्ययन किया गया है। अध्ययन में प्याज की क्षति कम करने के लिए वैज्ञानिक क्योरिंग पद्धतियों और भंडारण अवसंरचना को सुदृढ़ करने का सुझाव दिया गया है। इसके अतिरिक्त, सोयाबीन की कटाई व मड़ाई तथा सीताफल की तुड़ाई व रख-रखाव की तकनीकों में सुधार को मुख्य उपाय के रूप में रेखांकित किया गया है।

भंडारण में प्याज सड़ने से रोकने के 3 सबसे जरूरी नियम

खेत में वैज्ञानिक क्योरिंग (सुखाना): प्याज को उखाड़ने के बाद 3 से 5 दिनों तक खेत में पत्तियों से ढककर सुखाएं, फिर 10-15 दिन छायादार हवादार फर्श पर फैलाएं। जब तक प्याज की ऊपरी 2-3 परतें कागज़ जैसी सूखी और गर्दन (Neck) पूरी तरह बंद न हो जाए, भंडारण में न रखें।

हवादार भंडारण चाली (Natural Ventilated Chawl): प्याज को कभी भी बंद कमरे में या फर्श पर 3-4 फीट से ऊंचा ढेर न लगाएं। नीचे जालीदार बांस या लोहे की रैक बनाएं, जिससे नीचे और चारों तरफ से हवा का संचार बना रहे।

रोगाणुनाशक और छंटाई: भंडारण से पहले सड़े, कटे या दोमुंहे (Double) प्याज को बिल्कुल अलग कर दें, क्योंकि एक सड़ा हुआ प्याज पूरे ढेर में फंगस फैला देता है।

निष्कर्ष: खेत में पसीना बहाकर बंपर पैदावार लेना किसान की मेहनत का आधा हिस्सा है, लेकिन उस उपज को मंडी तक सही सलामत पहुंचाना ही असली मुनाफा तय करता है। महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में हर साल ₹2,711 करोड़ के प्याज का भंडारण में नष्ट होना यह साबित करता है कि अब समय आ गया है जब सरकार और किसान संगठन फसल-पश्चात प्रबंधन (Post-Harvest Infrastructure) पर पूरा ध्यान दें।

वैज्ञानिक क्योरिंग, आधुनिक हवादार भंडारण संरचनाओं और कुशल परिवहन को अपनाकर न सिर्फ किसानों की जेब में यह खोया हुआ राजस्व वापस लौटेगा, बल्कि बाजार में प्याज के दामों में आने वाले उतार-चढ़ाव पर भी स्थायी रोक लग सकेगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1. महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में हर साल कितना प्याज भंडारण के दौरान खराब हो जाता है?

उत्तर: वर्ल्ड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट इंडिया (WRI India) की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों राज्यों में प्रतिवर्ष लगभग 16.9 लाख टन रबी प्याज भंडारण और परिवहन के दौरान बर्बाद हो जाता है।

Q2. इस प्याज बर्बादी से किसानों को सालाना कितना आर्थिक नुकसान होता है?

उत्तर: फसल-पश्चात होने वाले इस नुकसान का कुल आर्थिक मूल्य लगभग ₹2,711 करोड़ आंका गया है।

Q3. प्याज को सड़ने से बचाने के लिए ‘क्योरिंग’ (Curing) क्यों जरूरी है?

उत्तर: क्योरिंग से प्याज की बाहरी त्वचा सूखकर मजबूत सुरक्षा कवच बन जाती है और प्याज की गर्दन सूखकर बंद हो जाती है, जिससे अंदर नमी और फंगल संक्रमण नहीं पहुंच पाता।

Q4. प्याज की बर्बादी रोकने से पर्यावरण को क्या फायदा होगा?

उत्तर: सड़ने वाले कचरे और अनावश्यक परिवहन में कमी आने से लगभग 10 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂e) समकक्ष ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन रोका जा सकता है।

Q5. रिपोर्ट में सोयाबीन और सीताफल के नुकसान को लेकर क्या सुझाव दिए गए हैं?

उत्तर: सोयाबीन में कटाई व मड़ाई (Threshing) के दौरान दानों को टूटने से बचाने वाली तकनीक और सीताफल में वैज्ञानिक तुड़ाई व शीघ्र कोल्ड-चेन हैंडलिंग अपनाने का सुझाव दिया गया है।

यह भी पढ़े: गेहूं का MSP ₹25 बढ़कर ₹2,610 हुआ: 0.97% बढ़ोतरी, महंगाई 4.82%- किसानों पर क्या असर?

जागरूक रहिए व नुकसान से बचिए और अन्य लोगों के जागरूकता के लिए साझा करें। कृषि लेख, सरकारी योजनाएं, कृषि तकनीक, व्यवसायिक एवं जैविक खेती से संबंधित सटीक जानकारियां प्राप्त करने के लिए जुड़े कृषि जागृति चलो गांव की ओर से या कृषि संबंधित किसी भी समस्या के जैविक समाधान के लिए WhatsApp करें।