त्योहारी सीजन की मांग और मानसून की विषमता के बीच खाद्य महंगाई (5.95%) को नियंत्रित करने के लिए भारत सरकार मसूर (Lentil) और पीली मटर (Yellow Peas) पर आयात शुल्क (Customs Duty) घटाने पर गंभीरता से विचार कर रही है। हालांकि, आगामी रबी बुवाई सत्र को देखते हुए चने पर 10% आयात शुल्क यथावत रखा जा सकता है, ताकि देश के किसान चने का रकबा बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित हों। जानिए मौजूदा शुल्क दरें, दलहन आयात के आंकड़े और रबी फसलों पर इसका संभावित असर।
मसूर और पीली मटर पर आयात शुल्क में कटौती
घरेलू आपूर्ति को सुदृढ़ करने और खाद्य मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के उद्देश्य से भारत सरकार मसूर और पीली मटर के आयात शुल्क में कटौती पर विचार कर रही है। मानसून की विषमता के कारण चालू वर्ष में दलहन उत्पादन में गिरावट की आशंका के बीच यह नीतिगत कदम उठाया जा सकता है।
चने पर 10% शुल्क बरकरार रखने का प्रस्ताव
वर्तमान में भारत लाल मसूर और चने के आयात पर 10 प्रतिशत तथा पीली मटर पर 30 प्रतिशत सीमा शुल्क आरोपित करता है। आगामी रबी बुवाई सत्र को ध्यान में रखते हुए चने पर आयात शुल्क यथावत रखने का प्रस्ताव है, जिससे कृषक चने का रकबा बढ़ाने के लिए प्रेरित हों।
73 लाख टन आयात और मानसून में 30% कमी
वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान देश में 2.57 करोड़ टन दलहन उत्पादन के सापेक्ष 73 लाख टन का आयात दर्ज किया गया था, जो कुल खपत का लगभग 23 प्रतिशत है। जून-सितंबर मानसून के दौरान प्रमुख दलहन उत्पादक क्षेत्रों में वर्षा में 30 प्रतिशत तक की कमी देखी गई है।
त्योहारी मांग और 5.95% खाद्य महंगाई
त्योहारी सीजन के आगमन से दाल मिलों, प्रसंस्करकों तथा उपभोक्ता परिवारों द्वारा अग्रिम भंडारण बढ़ाए जाने से बाजार में मांग तेज हुई है। अगस्त माह में खाद्य महंगाई दर 5.95 प्रतिशत दर्ज की गई, जिसमें तुअर (5.6%) और उड़द (7.4%) की उच्च दरें भी शामिल हैं।
निष्कर्ष: खाद्य महंगाई पर नियंत्रण और घरेलू किसानों के हितों के बीच संतुलन साधना सरकार के लिए हमेशा एक चुनौतीपूर्ण कार्य रहा है। मसूर और पीली मटर पर आयात शुल्क में संभावित कटौती जहां त्योहारी सीजन में आम उपभोक्ताओं और दाल मिलों को राहत पहुंचाएगी, वहीं चने पर 10% सीमा शुल्क को बनाए रखने का निर्णय आगामी रबी सत्र में दलहन उत्पादक किसानों को सुरक्षा कवच देगा। यदि सरकार घरेलू खरीद, भंडारण और तर्कसंगत आयात नीति का यह संतुलन बनाए रखती है, तो आने वाले रबी सत्र में देश दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता की ओर और मजबूती से कदम बढ़ा सकेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1. सरकार मसूर और पीली मटर पर आयात शुल्क क्यों घटाना चाहती है?
उत्तर: त्योहारी सीजन में बढ़ती मांग को पूरा करने, मानसून की कमी से संभावित फसल नुकसान की भरपाई करने और दालों की महंगाई (5.95%) को नियंत्रित करने के लिए शुल्क कटौती पर विचार हो रहा है।
Q2. वर्तमान में मसूर, पीली मटर और चने पर कितना आयात शुल्क लागू है?
उत्तर: वर्तमान में भारत लाल मसूर पर 10%, चने पर 10% और पीली मटर पर 30% सीमा शुल्क वसूलता है।
Q3. चने पर आयात शुल्क में राहत मिलने की संभावना क्यों कम है?
उत्तर: आगामी रबी बुवाई सत्र को देखते हुए सरकार चने पर शुल्क बनाए रखना चाहती है ताकि किसानों को स्थानीय मंडियों में उचित भाव मिले और वे चने का रकबा बढ़ाने के लिए प्रेरित हों।
Q4. भारत अपनी कुल खपत का कितना प्रतिशत दलहन आयात करता है?
उत्तर: वित्तीय वर्ष 2024-25 में देश में लगभग 2.57 करोड़ टन उत्पादन के मुकाबले 73 लाख टन दलहन आयात किया गया, जो कुल घरेलू खपत का लगभग 23 प्रतिशत है।
Q5. क्या आयात शुल्क घटने से घरेलू दालों के दाम तुरंत गिरेंगे?
उत्तर: शुल्क घटने से बंदरगाहों पर आयातित मसूर और मटर की लागत कम होगी, जिससे खुदरा बाज़ार और दाल मिलों में आपूर्ति बढ़ेगी और दामों में नरमी आएगी।
यह भी पढ़े: महाराष्ट्र-मध्य प्रदेश में हर साल ₹2,711 करोड़ का प्याज बर्बाद
जागरूक रहिए व नुकसान से बचिए और अन्य लोगों के जागरूकता के लिए साझा करें। कृषि लेख, सरकारी योजनाएं, कृषि तकनीक, व्यवसायिक एवं जैविक खेती से संबंधित सटीक जानकारियां प्राप्त करने के लिए जुड़े कृषि जागृति चलो गांव की ओर से या कृषि संबंधित किसी भी समस्या के जैविक समाधान के लिए WhatsApp करें।
कृषि जागृति-Krishi Jagriti एक अग्रणी डिजिटल समाचार मंच है, जो भारतीय किसानों को सशक्त बनाने के लिए समर्पित है। हमारा उद्देश्य किसानों तक नवीनतम कृषि लेख, सरकारी योजनाएं, उन्नत कृषि तकनीक, बाजार भाव और जैविक खेती से संबंधित सटीक और उपयोगी जानकारियों का प्रसारण करना है। हम ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों के जीवन में सकारात्मक सुधार लाने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं।
