मटर की अगेती बुवाई कब और कैसे करें? उन्नत किस्में, बीज दर, बीजोपचार और खाद की वैज्ञानिक विधि

रबी सीजन में मटर की अगेती खेती किसानों के लिए कम समय में सबसे ज्यादा मुनाफा देने वाला सौदा साबित होती है। बाजार में सबसे पहले हरी मटर पहुंचने पर किसानों को 60 से 80 रुपये प्रति किलो तक का थोक भाव आसानी से मिल जाता है। वहीं दूसरी ओर दाल, बेसन और छोले के लिए पीली मटर की मांग भी लगातार बनी रहती है। सही समय पर बुवाई, उन्नत किस्मों का चुनाव, उचित बीज दर (45-60 किग्रा/एकड़) और जैविक बीजोपचार से मटर की पैदावार में 25 से 30 फीसदी तक का इजाफा किया जा सकता है। जानिए अगेती और मुख्य मटर की वैज्ञानिक बुवाई का पूरा तरीका।

हरी सब्जी और दाल के लिए मटर की खेती

मटर की खेती सब्जी और दाल के लिए की जाती है। दाल आवश्यकता पूर्ति के लिए पीले मटर का उत्पादन किसान करते हैं। जिसका उपयोग दाल, बेसन ओर छोले के रूप में किया जाता है। वहीं हरे दानो की डिब्बाबंदी करके बेमौसमी उपयोग किया जाता है। मटर की खेती से अधिक लाभ लेने के लिए किसान इसकी अगेती बुआई करते हैं।

मटर की अगेती, मध्यम और पछेती उन्नत किस्में

मटर की अगेती उन्नत किस्में: आर्केल, पंजाब अगेती-6, अर्ली बैजर, बोनविले, असौजी, अर्ली दिसंबर, पंत उपहार, जवाहर मटर, पंत सब्जी मटर-3, कासी उदय-नंदिनी-मुक्ति, आजाद मटर-3, वीएल-71 इसके अलावा निजी कंपनियां भी मटर बीज उपलब्ध करवा रही हैं। हमारे किसान भाई अपने विवेकाअनुसार बीज की खरीद कर अगेती बुआई कर सकते हैं।

मटर की मध्यम किस्में: टी-9, 56, एनपी 29

मटर की पछेती किस्में: आजाद मटर-2, जवाहर मटर-2 आदि।

प्रति एकड़ बीज दर और बीजोपचार की सही विधि

बीज दर प्रति एकड़: डेढ़ से दो किलोग्राम प्रति प्रति कट्ठा अगेती किस्म दे- यानी प्रति एकड़ 45 से 60 किलोग्राम। एक से डेढ़ किलोग्राम प्रति प्रति कट्ठा मध्यम व पछेती किस्म दें- यानि प्रति एकड़ 30 से 45 किलोग्राम।

बुवाई से पहले बीजोपचार: प्रति किलोग्राम बीज को किसी जैविक कीटनाशक से उपचार करें। इसके लिए आप 5 से 10 एम.एल जी-स्यूडो प्लस या जी-पोटाश एडवांस को प्रति किलोग्राम बीज के साथ उपचारित कर 15 से 20 मिनट तक किसी छायादार स्थान पर सुखा कर मुख्य खेत में बुआई करें।

बुवाई का सही समय और कतार से कतार की दूरी

बुआई का समय: मटर की अगेती किस्म की बुआई के लिए सितंबर का अंतिम सप्ताह से अक्टूबर का पहला सप्ताह बुलाई के लिए उपयुक्त होता है।

दाल एवं मटर के लिए 14 अक्टूबर से 30 अक्टूबर तक बुआई कर सकते हैं। जिससे आप दाल एवं छोले व बेसन के लिए इस्तेमाल किया जाता है। मटर की अगेती बुआई करते समय कतार से कतार की दूरी 30 सेमी, मध्यम व पछेती बुआई के लिए 45 सेमी रखें।

पौध से पौध की दूरी 10 से 15 सेमी रखें। इससे पौधों में धूप और हवा का संचार बना रहता हैं। ज्यादा घने पौधे होने से एक समान पौधों को हवा व धूप का संचार नहीं मिलता जिससे पौधे पौधे कमजोर ओर पोषण रहती हो जाते हैं।

खाद, उर्वरक प्रबंधन और मिट्टी का शोधन

खाद एवं उर्वरक की मात्रा: 150 किलोग्राम 12 माह पुरानी सड़ी हुई गोबर की खाद, एक लीटर जी-पोटाश ओर 10 किलोग्राम जी-सी पावर किसी छायादार स्थान पर मिलाकर 30 मिनट तक हवा लगने के बाद प्रति एकड़ खेत में छिड़कर मिट्टी उपचार कर बुआई करें।

मटर की अगेती बुवाई में किसान कभी न करें ये 3 गलतियां

तापमान अधिक होने पर बुवाई: यदि दिन का तापमान 32-35°C से अधिक बना हुआ है, तो बुवाई से बचें। उच्च तापमान पर मटर के बीजों का अंकुरण प्रभावित होता है और उकठा (विल्ट) रोग का खतरा बढ़ जाता है।

सघन (बहुत घनी) बुवाई करना: अधिक पैदावार के लालच में बीजों को बहुत पास-पास न डालें। पौधों के बीच 10 से 15 सेमी की दूरी अनिवार्य है ताकि हवा और धूप का संचार सही रहे और फलियों का आकार बड़ा बने।

कच्ची गोबर खाद का प्रयोग: खेत में कभी भी कच्ची या अधपकी गोबर खाद न डालें। हमेशा 12 महीने पुरानी सड़ी हुई गोबर की खाद का ही प्रयोग करें, अन्यथा दीमक और जड़ सड़न का प्रकोप बढ़ जाएगा।

अस्वीकरण (Disclaimer): यह तकनीकी जानकारी Anil Kumar Prasad द्वारा अपने 5 वर्षों के व्यावहारिक खेती के अनुभव और कृषि विश्वविद्यालयों/वैज्ञानिक अनुसंधानों (ICAR/CIB&RC) के आधार पर साझा की गई है। किसी भी कीटनाशक, फफूंदनाशक या रासायनिक उर्वरक के प्रयोग से पहले अपने स्थानीय कृषि रक्षा केंद्र, KVK या उद्यान विभाग की सलाह अवश्य लें और लेबल-क्लेम नियमों का पालन करें।

निष्कर्ष: अगेती मटर की खेती रबी सत्र में कम समय के भीतर किसान की जेब भरने वाली सबसे कारगर नकदी फसल है। समय पर बुवाई, आर्केल और काशी उदय जैसी प्रमाणित किस्मों का चयन, 45 से 60 किलो प्रति एकड़ की सही बीज दर और बुवाई से पहले जैविक बीजोपचार को अपनाकर न केवल फसल को रोगों से बचाया जा सकता है।

बल्कि सबसे पहले मंडियों में पहुंचकर 60 से 80 रुपये किलो का ऊंचा भाव भी हासिल किया जा सकता है। किसान भाई खेत में पर्याप्त नमी का ध्यान रखते हुए कतारबद्ध बुवाई करें और भरपूर पैदावार सुनिश्चित करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1. मटर की अगेती बुवाई के लिए सबसे उपयुक्त समय कौन-सा है?

उत्तर: हरी सब्जी के लिए अगेती मटर की बुवाई सितंबर के अंतिम सप्ताह से अक्टूबर के पहले-दूसरे सप्ताह (15 अक्टूबर तक) के बीच करना सबसे उपयुक्त माना जाता है।

Q2. दाल, बेसन और छोले के लिए पीली मटर की बुवाई कब करनी चाहिए?

उत्तर: दाल और छोले की आवश्यकता पूर्ति के लिए पीली मटर की बुवाई 14 अक्टूबर से 30 अक्टूबर के मध्य की जाती है।

Q3. अगेती मटर की प्रति एकड़ बीज दर कितनी लगती है?

उत्तर: अगेती किस्मों के लिए प्रति एकड़ लगभग 45 से 60 किलोग्राम (डेढ़ से दो किलो प्रति कट्ठा) बीज की आवश्यकता होती है।

Q4. मटर की बुवाई से पहले बीजोपचार क्यों आवश्यक है?

उत्तर: बीजोपचार करने से बीज जनित कवक, उकठा (विल्ट) और जड़ गलन रोगों से शुरुआती सुरक्षा मिलती है तथा अंकुरण क्षमता में सुधार होता है।

Q5. अगेती मटर में कतार और पौधों की दूरी कितनी रखनी चाहिए?

उत्तर: कतार से कतार की दूरी 30 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 10 से 15 सेंटीमीटर रखनी चाहिए, जिससे पौधों को पर्याप्त धूप और हवा मिलती रहे।

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