मध्य प्रदेश में मूंग सुखाने के लिए पैराक्वेट डाइक्लोराइड पर प्रतिबंध

मध्य प्रदेश सरकार ने मूंग की फसल को जल्दी सुखाने के लिए धड़ल्ले से इस्तेमाल किए जा रहे अत्यंत विषैले रसायन ‘पैराक्वेट डाइक्लोराइड’ (Paraquat Dichloride) के उपयोग, बिक्री और भंडारण पर तत्काल प्रभाव से पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। राज्य के कृषि विभाग ने सभी कीटनाशक निर्माता कंपनियों को बाजार से अपना पूरा स्टॉक वापस मंगाकर नष्ट करने और केंद्रीय कीटनाशी बोर्ड एवं पंजीकरण समिति (CIBRC) को अपने लाइसेंस प्रमाण-पत्र लौटाने के कड़े आदेश जारी किए हैं।

फसल को 24 से 72 घंटे में सुखाने के चक्कर में इंसानी किडनी, लिवर और मस्तिष्क को सड़ाने वाले इस रसायन का कोई एंटीडोट (प्रतिविष) भी मौजूद नहीं है। पिछले सीजन में नर्मदापुरम से भोपाल तक हुए किसान आंदोलन और इस प्रतिबंध की पूरी पड़ताल।

पैराक्वेट डाइक्लोराइड पर पूर्ण प्रतिबंध

मध्य प्रदेश सरकार ने मूंग की फसल को जल्दी सुखाने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे अत्यंत विषैले रसायन पैराक्वेट डाइक्लोराइड के उपयोग, बिक्री और भंडारण पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। राज्य के कृषि विभाग ने संबंधित कीटनाशक कंपनियों को बाजार से शेष स्टॉक तुरंत वापस मंगाने तथा नियमानुसार उसे नष्ट करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।

कंपनियों के लाइसेंस और स्वास्थ्य खतरे

सरकार द्वारा संबंधित निर्माणकर्ता कंपनियों को अपने पंजीकरण प्रमाण-पत्र केंद्रीय कीटनाशी बोर्ड एवं पंजीकरण समिति को वापस लौटाने के आदेश दिए गए हैं। राज्य में किसान किसान इस रसायन का छिड़काव फसल को 24 से 72 घंटे में सुखाने के लिए कर रहे थे। इसके सीधे संपर्क या रासायनिक अवशेषों से दूषित मूंग के सेवन से किडनी, लिवर और मस्तिष्क को गंभीर नुकसान पहुंचने का खतरा है।

कोई एंटीडोट नहीं और किसान आंदोलन

विभागीय रिपोर्टों के अनुसार, इस घातक रसायन के विषाक्त प्रभाव को निष्प्रभावी करने के लिए कोई विशिष्ट प्रतिविष उपलब्ध नहीं है। उल्लेखनीय है कि पिछले ग्रीष्मकालीन सीजन के दौरान भी इसके इस्तेमाल से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों के कारण राज्य सरकार ने मूंग की सरकारी खरीद से इनकार किया था। इसके बाद किसानों ने नर्मदापुरम से भोपाल तक मार्च निकाला, जिसके पश्चात सरकार ने खरीद प्रक्रिया शुरू की थी।

पैराक्वेट डाइक्लोराइड पर बैन लगने के 3 बड़े कारण

शरीर के महत्वपूर्ण अंगों पर सीधा हमला: इस रसायन के संपर्क में आने या इससे उपचारित मूंग की दाल का सेवन करने से रासायनिक अवशेष शरीर में जमा होकर किडनी, लिवर और मस्तिष्क के तंत्रिका तंत्र (Nervous System) को स्थायी रूप से नष्ट कर देते हैं।

कोई इलाज या एंटीडोट नहीं: मेडिकल साइंस के अनुसार इस घातक रसायन के जहर को काटने के लिए दुनिया में कोई विशिष्ट एंटीडोट नहीं है। इसका हल्का सा रिसाव भी किसान के फेफड़ों को हमेशा के लिए खराब कर देता है।

सरकारी खरीद और अंतरराष्ट्रीय बाजार पर खतरा: रासायनिक अवशेष युक्त मूंग की दाल मिलने से सरकार को खरीद रोकनी पड़ी थी, जिससे पूरे राज्य के मूंग किसानों की साख पर बट्टा लग रहा था और दाल की गुणवत्ता खराब हो रही थी।

निष्कर्ष: फसल को 24 से 48 घंटे पहले समेटने के लालच में खेतों में ऐसा जहर छिड़कना जिसका कोई इलाज ही न हो, न केवल खेती की मर्यादा के खिलाफ है बल्कि लाखों उपभोक्ताओं की जिंदगी के साथ खुला खिलवाड़ है। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा पैराक्वेट डाइक्लोराइड पर लगाया गया यह प्रतिबंध देर से उठाया गया मगर अत्यंत आवश्यक और स्वागत योग्य कदम है।

कंपनियों से स्टॉक वापस मंगाने के साथ-साथ प्रशासन को जमीनी स्तर पर दुकानों की सख्त जांच करनी होगी, ताकि चोरी-छिपे इसकी बिक्री रोकी जा सके। किसानों को भी समझना होगा कि दो दिन की जल्दबाजी के लिए अपनी ही मिट्टी और समाज के स्वास्थ्य को दांव पर लगाना कभी समझदारी नहीं हो सकती।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1. मध्य प्रदेश सरकार ने किस कीटनाशक रसायन पर तत्काल प्रतिबंध लगाया है?

उत्तर: राज्य सरकार ने मूंग की फसल को जबरन सुखाने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे अत्यंत विषैले शाकनाशी ‘पैराक्वेट डाइक्लोराइड’ पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।

Q2. किसान मूंग की फसल में पैराक्वेट डाइक्लोराइड का छिड़काव क्यों कर रहे थे?

उत्तर: किसान फसल को प्राकृतिक रूप से पकने का इंतजार किए बिना 24 से 72 घंटे के भीतर पौधों को सुखाकर जल्दी कंबाइन हार्वेस्टर से कटाई कराने के लिए इसका छिड़काव कर रहे थे।

Q3. यह रसायन मानव स्वास्थ्य के लिए कितना खतरनाक है?

उत्तर: इसके संपर्क या अवशेषों से दूषित दाल खाने से किडनी, लिवर और मस्तिष्क को गंभीर नुकसान होता है, और सबसे घातक बात यह है कि इसका कोई चिकित्सीय प्रतिविष (एंटीडोट) उपलब्ध नहीं है।

Q4. सरकार ने कीटनाशक निर्माता कंपनियों को क्या निर्देश दिए हैं?

उत्तर: कंपनियों को बाजार से शेष स्टॉक तुरंत वापस मंगाकर नष्ट करने और अपने पंजीकरण प्रमाण-पत्र केंद्रीय कीटनाशी बोर्ड एवं पंजीकरण समिति (CIBRC) को वापस सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

Q5. पिछले ग्रीष्मकालीन सीजन में इस रसायन को लेकर क्या विवाद हुआ था?

उत्तर: रासायनिक अवशेषों के स्वास्थ्य जोखिमों के चलते सरकार ने मूंग की सरकारी खरीद रोक दी थी, जिसके विरोध में किसानों ने नर्मदापुरम से भोपाल तक विशाल पैदल मार्च निकाला था।

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