किसान भाइयों, हरियाणा में धान की खेती करने वाले किसानों के लिए 17 अक्टूबर 2026 को जारी एक महत्वपूर्ण सरकारी आदेश सामने आया है। इस आदेश से उन किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनके खेतों में धान की पैदावार निर्धारित जिला-स्तरीय उत्पादन सीमा से अधिक हुई है और इस वजह से उन्हें अपनी पूरी उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP पर बेचने में परेशानी आ रही थी। अब सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि किसान की वास्तविक उपज निर्धारित सीमा से अधिक है, तो वह अतिरिक्त धान की खरीद के लिए आवेदन कर सकता है। संबंधित अधिकारियों द्वारा दावे की पुष्टि होने पर अतिरिक्त मात्रा में भी धान की खरीद की जाएगी।
17 अक्टूबर का सरकारी आदेश
हरियाणा सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, पंचकूला की ओर से 17 अक्टूबर 2026 को जारी ज्ञापन संख्या 6775-99/Stat/ASO-VII/2026 में धान की निर्धारित उत्पादन सीमा से अधिक उपज होने की स्थिति में अतिरिक्त धान की खरीद को लेकर निर्देश दिए गए हैं। यह निर्देश खरीफ विपणन सीजन 2026-27 यानी KMS 2026-27 के लिए जारी किए गए हैं। राज्य के सभी उपायुक्तों को इन निर्देशों की जानकारी देते हुए इनका पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है।
उत्पादन सीमा तय करने का कारण
किसान भाइयों, इस मामले को समझना जरूरी है। हरियाणा सरकार ने भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप खरीफ विपणन सीजन 2026-27 के लिए जिलावार धान की उत्पादन सीमा निर्धारित की थी। इसके लिए पिछले तीन वर्षों की औसत उपज को आधार बनाया गया था। इस संबंध में पहले 25 सितंबर 2026 को ज्ञापन संख्या 6051/Stat/ASO-VII/2026 के माध्यम से निर्देश जारी किए गए थे। लेकिन खेती में हर साल उत्पादन एक जैसा नहीं होता।
मौसम अनुकूल रहने, सिंचाई की बेहतर सुविधा, अच्छी किस्म के बीज, समय पर खाद प्रबंधन और फसल की अच्छी देखभाल के कारण किसी किसान की उपज पिछले वर्षों की तुलना में अधिक हो सकती है। दूसरी ओर, अलग-अलग खेतों की मिट्टी, पानी की उपलब्धता और खेती के तरीकों के कारण भी उत्पादन में अंतर देखने को मिलता है।
ऐसी स्थिति में यदि किसी किसान ने वास्तव में ज्यादा धान पैदा किया है, लेकिन मंडी में उसकी खरीद निर्धारित उत्पादन सीमा के आधार पर रोक दी जाती है, तो किसान के सामने अपनी फसल बेचने की समस्या खड़ी हो सकती है। किसानों की ओर से इसी तरह की शिकायतें सरकार और संबंधित विभागों तक पहुंची थीं।
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग, हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड और कृषि विभाग के माध्यम से किसानों की समस्याएं सामने रखी गईं। जिला प्रशासन के स्तर पर भी इस विषय को उठाया गया। इन शिकायतों पर विचार करने के बाद सरकार ने अतिरिक्त उपज की खरीद के लिए सत्यापन की प्रक्रिया स्पष्ट की है।
अतिरिक्त उपज की आवेदन प्रक्रिया
इस आदेश का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा किसानों के लिए निर्धारित आवेदन प्रक्रिया है। यदि किसी किसान की वास्तविक धान उपज तय उत्पादन सीमा से अधिक है और उसे अतिरिक्त धान बेचने में परेशानी आ रही है, तो वह संबंधित HSAMB सचिव के पास लिखित आवेदन प्रस्तुत कर सकता है। HSAMB का पूरा नाम हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड है।
किसान को अपने आवेदन में यह स्पष्ट करना होगा कि उसकी वास्तविक धान उपज निर्धारित सीमा से अधिक है और वह अतिरिक्त उपज की सरकारी खरीद करवाना चाहता है। आवेदन मिलने के बाद संबंधित HSAMB सचिव उस दावे को जांच के लिए संबंधित राजस्व अधिकारियों या कृषि विभाग के अधिकारियों के पास भेजेंगे।
इसके बाद किसान की वास्तविक उपज का सत्यापन किया जाएगा। आदेश में कहा गया है कि जहां उपलब्ध हों, वहां किसान के पिछले उत्पादन और बिक्री से संबंधित रिकॉर्ड के आधार पर दावे की जांच की जाएगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसान की वास्तविक उपज का आकलन किया जाए और पात्र किसान को केवल निर्धारित औसत उत्पादन सीमा के कारण अतिरिक्त धान बेचने में परेशानी न हो।
48 घंटे में सत्यापन का नियम
किसान भाइयों, सरकारी आदेश में सत्यापन को लेकर स्पष्ट समय-सीमा तय की गई है। अधिक उपज के दावे का सत्यापन संबंधित राजस्व अधिकारियों या कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा 48 घंटे के भीतर किया जाना है। इसका अर्थ है कि किसान द्वारा अतिरिक्त उपज का दावा प्रस्तुत किए जाने के बाद संबंधित अधिकारियों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जल्द जांच करनी होगी। सत्यापन की प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से लंबा खींचने के बजाय तय समय-सीमा के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया गया है।
इस आदेश का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यदि राजस्व विभाग या कृषि विभाग के अधिकारियों में से कोई एक भी किसान की अधिक उपज के दावे की पुष्टि कर देता है, तो अतिरिक्त मात्रा में धान की खरीद भी की जाएगी। यानी आदेश में अतिरिक्त धान की खरीद के लिए दोनों विभागों से एक साथ पुष्टि होने की अनिवार्यता नहीं रखी गई है। राजस्व या कृषि विभाग में से किसी एक के अधिकारी द्वारा अधिक उपज की पुष्टि किए जाने पर अतिरिक्त मात्रा की खरीद का रास्ता खुल सकता है।
हालांकि, किसानों को यह समझना चाहिए कि यह प्रक्रिया सत्यापन पर आधारित है। इसका अर्थ यह नहीं है कि बिना आवेदन और जांच के हर किसान की हर अतिरिक्त मात्रा स्वतः खरीद ली जाएगी। किसान को अपना दावा संबंधित अधिकारी के सामने रखना होगा और निर्धारित प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
क्या अब किसान का पूरा धान MSP पर बिक सकेगा?
सरकारी आदेश के अनुसार, जिन किसानों की वास्तविक धान उपज निर्धारित सीमा से अधिक है, उनके दावे की पुष्टि होने पर अतिरिक्त मात्रा में भी खरीद की जाएगी। इसलिए ऐसे किसानों के लिए यह महत्वपूर्ण राहत है, जिनकी उपज तय सीमा से ज्यादा होने के कारण सरकारी खरीद में समस्या आ रही थी।
लेकिन यहां एक बात का ध्यान रखना जरूरी है। आदेश में अतिरिक्त उपज के दावे की जांच और पुष्टि के बाद खरीद करने की प्रक्रिया बताई गई है। इसलिए इसे बिना किसी शर्त के सभी किसानों के लिए उत्पादन सीमा पूरी तरह समाप्त कर देने वाला आदेश समझना सही नहीं होगा। सही बात यह है कि वास्तविक उपज निर्धारित सीमा से अधिक होने पर सत्यापन के माध्यम से अतिरिक्त धान की खरीद का प्रावधान स्पष्ट किया गया है।
यदि किसान की वास्तविक उपज निर्धारित सीमा से कम है, तो यह विशेष प्रक्रिया उसके लिए अतिरिक्त मात्रा का दावा करने का मामला नहीं बनती। इसी तरह, किसान को सरकारी खरीद से संबंधित अन्य लागू नियमों और आवश्यक प्रक्रियाओं का भी पालन करना होगा।
किसानों को अब क्या करना चाहिए?
अगर आप हरियाणा के किसान हैं और आपकी धान की उपज निर्धारित सीमा से अधिक है, तो सबसे पहले अपनी उपज और बिक्री से संबंधित उपलब्ध दस्तावेज व्यवस्थित रखें। पिछले वर्षों के उत्पादन या बिक्री का रिकॉर्ड उपलब्ध है, तो उसे सुरक्षित रखें। मंडी में धान की बिक्री से संबंधित पर्चियां और अन्य रिकॉर्ड भी संभालकर रखें।
इसके बाद संबंधित HSAMB सचिव के पास लिखित आवेदन देकर अपनी वास्तविक उपज के सत्यापन और अतिरिक्त धान की खरीद का अनुरोध करें। आवेदन जमा करने के बाद उसकी प्राप्ति या अन्य उपलब्ध प्रमाण अपने पास रखें। यदि तय समय-सीमा में सत्यापन नहीं होता, तो संबंधित अधिकारी से आवेदन की स्थिति के बारे में जानकारी लें और जरूरत पड़ने पर जिला प्रशासन के सामने मामला उठाएं।
किसान भाइयों, आवेदन करते समय अपनी जानकारी सही दें और वास्तविक उत्पादन से संबंधित उपलब्ध रिकॉर्ड प्रस्तुत करें। यदि मंडी में आपकी उपज निर्धारित सीमा के कारण नहीं खरीदी जा रही है, तो केवल मौखिक बातचीत पर निर्भर रहने के बजाय लिखित आवेदन देना अधिक उपयोगी रहेगा।
प्रशासन की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण है।
सरकार ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि आदेश का पालन उसकी भावना और शब्दों के अनुरूप किया जाए, ताकि किसानों को मंडियों में अपनी धान की उपज बेचने के लिए अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। अब इस व्यवस्था की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि आवेदन समय पर स्वीकार हों, सत्यापन 48 घंटे में पूरा किया जाए और जिन किसानों की अधिक उपज की पुष्टि हो, उनका अतिरिक्त धान खरीद प्रक्रिया में शामिल किया जाए।
धान की कटाई के मौसम में किसान के सामने मजदूरी, परिवहन, भंडारण और अगली फसल की तैयारी जैसे कई खर्च होते हैं। ऐसे में मंडी में धान की बिक्री में देरी उसकी आर्थिक स्थिति को प्रभावित कर सकती है। इसलिए इस आदेश का समयबद्ध क्रियान्वयन किसानों के हित में महत्वपूर्ण है।
किसान भाइयों, हरियाणा सरकार का 17 अक्टूबर 2026 का यह आदेश उन किसानों के लिए खास है, जिनकी वास्तविक धान उपज निर्धारित उत्पादन सीमा से अधिक है। ऐसे किसान संबंधित HSAMB सचिव के पास लिखित आवेदन दें और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करवाएं। दावा सही पाए जाने पर अतिरिक्त धान की खरीद का प्रावधान मौजूद है।
अब आप बताइए-क्या आपके जिले में भी निर्धारित उत्पादन सीमा के कारण धान की खरीद रोकी जा रही थी? आपके खेत में प्रति एकड़ कितने क्विंटल धान पैदा हुआ है और मंडी में कितनी मात्रा की खरीद हुई? अपना जिला, मंडी और समस्या कमेंट में जरूर बताएं, ताकि दूसरे किसान भी इस जानकारी से जागरूक हो सकें।
अतिरिक्त धान बेचने के लिए किसान कभी न करें ये 3 गलतियां
केवल मौखिक शिकायत पर निर्भर रहना: मंडी में यदि तौल रुकती है, तो केवल मौखिक बातचीत न करें। तुरंत संबंधित मार्केट कमेटी सचिव (HSAMB) के पास लिखित आवेदन दें और उसकी रिसीविंग (पावती) अपने पास सुरक्षित रखें।
सत्यापन में 48 घंटे से अधिक की देरी सहना: आदेश में स्पष्ट लिखा है कि सत्यापन 48 घंटे के भीतर होना है। यदि तय समय में पटवारी या कृषि अधिकारी खेत का सत्यापन न करें, तो तुरंत एसडीएम या जिला उपायुक्त (DC) से संपर्क करें।
दस्तावेजों को संभालकर न रखना: आवेदन के साथ अपनी ‘मेरी फसल मेरा ब्योरा’ की पर्ची, पिछले साल की बिक्री रसीदें और खेत का सही ब्योरा जरूर संलग्न करें ताकि अधिकारी आपके दावे को तुरंत प्रमाणित कर सकें।
निष्कर्ष: हरियाणा सरकार का 17 अक्टूबर 2026 का यह आदेश उन प्रगतिशील किसानों के लिए एक बड़ी जीवनरेखा है, जिन्होंने उन्नत बीज, संतुलित खाद और कड़ी मेहनत से औसत सीमा से अधिक धान पैदा किया है। औसत आंकड़ों की तकनीकी बाध्यता के कारण किसानों की उपज को मंडियों में अटकने से बचाना और 48 घंटे के भीतर सत्यापन की समयसीमा तय करना एक स्वागत योग्य और संवेदनशील प्रशासनिक कदम है।
अब यह जिला प्रशासन, मार्केट कमेटियों और राजस्व अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे बिना किसी लालफीताशाही के किसानों के आवेदनों का त्वरित निस्तारण करें, ताकि कटाई के इस व्यस्त मौसम में अन्नदाता को अपनी ही फसल बेचने के लिए मंडियों में परेशान न होना पड़े।
अस्वीकरण: यह विश्लेषणात्मक रिपोर्ट Anil Kumar Prasad द्वारा आधिकारिक आंकड़ों, विभिन्न विश्वसनीय समाचार स्रोतों और जमीनी कृषि वास्तविकताओं के निष्पक्ष अध्ययन के आधार पर तैयार की गई है। इसका उद्देश्य नीतिगत निर्णयों और बाजार की स्थिति से किसानों को अवगत कराना है। इस विषय पर अपने क्षेत्र की स्थिति और विचार हमारे WhatsApp पर जरूर साझा करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1. हरियाणा सरकार ने अतिरिक्त धान की MSP खरीद के लिए क्या नया आदेश दिया है?
उत्तर: 17 अक्टूबर 2026 के सरकारी ज्ञापन के तहत यदि किसी किसान की वास्तविक धान उपज तय जिला-स्तरीय सीमा से अधिक है, तो सत्यापन के बाद अतिरिक्त मात्रा की भी एमएसपी पर खरीद की जाएगी।
Q2. अतिरिक्त धान बेचने के लिए किसान को कहाँ आवेदन करना होगा?
उत्तर: किसान को अपनी संबंधित अनाज मंडी के मार्केट कमेटी सचिव (HSAMB सचिव) के पास लिखित रूप में आवेदन प्रस्तुत करना होगा।
Q3. अधिक उपज के दावे का सत्यापन कितने समय में पूरा होना अनिवार्य है?
उत्तर: सरकारी आदेश के अनुसार राजस्व विभाग या कृषि विभाग के अधिकारियों को किसान के आवेदन के 48 घंटे के भीतर सत्यापन पूरा करना होगा।
Q4. क्या अतिरिक्त खरीद के लिए राजस्व और कृषि दोनों विभागों की मंजूरी जरूरी है?
उत्तर: नहीं, आदेश में स्पष्ट किया गया है कि राजस्व विभाग या कृषि विभाग में से किसी एक भी विभाग के अधिकारी द्वारा पुष्टि किए जाने पर अतिरिक्त खरीद की जा सकेगी।
Q5. क्या हरियाणा में धान की उत्पादन सीमा पूरी तरह समाप्त कर दी गई है?
उत्तर: नहीं, उत्पादन सीमा स्वतः समाप्त नहीं हुई है; यह प्रक्रिया सत्यापन पर आधारित है, यानी जिन किसानों की उपज वास्तव में अधिक है, केवल उन्हीं को जांच के बाद अतिरिक्त खरीद की छूट मिलेगी।
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मैं एक प्रगतिशील किसान और कृषि पत्रकार (Agricultural Journalist) हूँ। और पिछले 5 वर्षों से खेती की बारीकियों को धरातल पर सीख और समझ रहा हूं। ‘कृषि जागृति – चलो गांव की ओर’ के माध्यम से मैं अपने जमीनी अनुभव और खेती की सटीक जानकारियां साझा करता हूँ। मेरा उद्देश्य सरकारी योजनाओं, आधुनिक तकनीक और जैविक खेती के जरिए साथी किसानों को सशक्त बनाना है।
