भारत के कृषि निर्यात क्षेत्र से एक चिंताजनक खबर सामने आ रही है। देश का तेल खली निर्यात चालू वित्त वर्ष में करीब 40 प्रतिशत तक टूट गया है। यह गिरावट इतनी बड़ी है कि इसने व्यापारिक गलियारों में हलचल मचा दी है। लेकिन इस भारी गिरावट के पीछे की असली कहानी क्या है?
सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन के अनुसार, दिसंबर महीने में भारत के तेल खली निर्यात में तेज गिरावट दर्ज की गई है। सालाना आधार पर निर्यात 40 प्रतिशत घटकर 2.40 लाख टन रह गया, जबकि एक वर्ष पहले इसी महीने यह 3.98 लाख टन था। इस तेज गिरावट का मुख्य कारण सोयाबीन खली के निर्यात में आई भारी कमी बताया गया है।
आंकड़ों के मुताबिक, सोयाबीन खली का निर्यात घटकर 1.14 लाख टन पर आ गया, जो पिछले वर्ष 2.78 लाख टन था। कुल गिरावट में सबसे बड़ा योगदान इसी खंड का रहा। सरसों खली का निर्यात भी कमजोर पड़कर 71,452 टन रह गया, जबकि अरंडी बीज और मूंगफली खली के शिपमेंट में भी गिरावट दर्ज की गई।
हालांकि, चावल की भूसी से बने राइस ब्रान एक्सट्रैक्शन के निर्यात में मजबूत बढ़ोतरी देखने को मिली, जिससे अन्य खंडों में आई गिरावट की कुछ हद तक भरपाई हो सकी। अप्रैल से दिसंबर की अवधि में कुल ऑयलमील निर्यात सालाना आधार पर 6 प्रतिशत कम रहा है।
एसोसिएशन ने कहा कि कमजोर वैश्विक मांग और आपूर्ति पक्ष की बाधाओं के कारण निर्यात पर दबाव बना हुआ है। सरसों की पेराई कम रहने और अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी जैसी चुनौतियां भी बाजार को प्रभावित कर रही हैं। हालांकि चीन को सरसों खली का निर्यात बढ़ा है, लेकिन ऊंची वैश्विक कीमतें और सीमित उपलब्धता आने वाले महीनों में इस प्रमुख बाजार से मांग को सीमित कर सकती हैं।
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