कृषि जागृति-Krishi Jagriti

Krishi Jagriti Chalo Gavan Kee Aur | Agri Care & Organic Farming | Agriculture & Farming

  • Home
  • कृषि जागृति
  • कृषि समाचार
  • पशुपालन
  • कृषि तकनीक
  • कृषि उपकरण
  • सरकारी योजनाएं
  • कृषि जागृति संदेश
  • गैलवे कृषम फार्मिंग

रबी खेती में बदलाव की बयार से टिकाऊ पद्धतियों पर बढ़ता जोर..!

26/01/2026 by krishijagriti5

अक्टूबर से मार्च तक चलने वाला रबी का मौसम गेहूं, जौ, सरसों, चना और मटर जैसी प्रमुख फसलों के लिए निर्णायक चरण माना जाता है। अब तक खेती का फोकस मुख्य रूप से अधिक उपज पर रहा है, लेकिन कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि बदलती जलवायु और घटते प्राकृतिक संसाधनों के बीच किसानों को टिकाऊ खेती पद्धतियों की ओर बढ़ना होगा, जो मिट्टी और पानी की रक्षा करने के साथ-साथ लंबे समय तक स्थिर आय भी सुनिश्चित कर सकें।

विशेषज्ञों के अनुसार, सर्दियों के महीनों में जब सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता सीमित रहती है, तब प्रभावी जल प्रबंधन सर्वोच्च प्राथमिकता बन जाता है। खेतों की सिंचाई सुबह जल्दी या शाम के समय करने की सलाह दी जा रही है, ताकि वाष्पीकरण से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके। पानी केवल फसल के महत्वपूर्ण विकास चरणों में ही देने से न सिर्फ खपत घटती है, बल्कि उपज पर भी सकारात्मक असर पड़ता है। ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों को अपनाने से पानी की बचत के साथ-साथ बेहतर वितरण और लागत में भी कमी आती है।

मिट्टी के स्वास्थ्य को बनाए रखना रबी खेती की टिकाऊ सफलता के लिए उतना ही अहम है। बुवाई से पहले कम्पोस्ट या गोबर की खाद जैसी जैविक सामग्री मिलाने से मिट्टी की उर्वरता और नमी धारण क्षमता बढ़ती है। विशेषज्ञ फसल अवशेष जलाने के बजाय उन्हें खेत में मिलाने पर जोर दे रहे हैं, जिससे मिट्टी में जैविक कार्बन बढ़ता है और उसकी संरचना मजबूत होती है। फसल चक्र को अपनाना भी उत्पादकता और टिकाऊपन की कुंजी है। अनाज के बाद चना या मसूर जैसी दालों की खेती करने से मिट्टी में प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन की भरपाई होती है, जबकि सरसों को चक्र में शामिल करने से न केवल मिट्टी मजबूत होती है, बल्कि कीट और रोगों का चक्र भी टूटता है।

बीज चयन को लेकर भी विशेषज्ञ सतर्क दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दे रहे हैं। प्रमाणित और क्षेत्र-विशिष्ट किस्में, जिनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता और जल्दी पकने की विशेषता हो, अपनाने से मौसम के अंत में बढ़ते तापमान से होने वाले नुकसान से बचाव होता है और अनाज की गुणवत्ता भी बनी रहती है। संतुलित उर्वरक उपयोग को उत्पादकता और लागत नियंत्रण दोनों के लिए जरूरी माना जा रहा है। उर्वरक डालने से पहले मिट्टी की जांच, नाइट्रोजन की खुराक को चरणों में देना और जैव उर्वरकों का उपयोग पोषक तत्वों की बर्बादी रोकता है और मिट्टी की जैविक सक्रियता बनाए रखता है।

विशेषज्ञ कीट और रोगों की नियमित निगरानी पर भी जोर दे रहे हैं और रसायनों के प्रयोग से पहले पर्यावरण-अनुकूल नियंत्रण विधियों को प्राथमिकता देने की सलाह दी जा रही है। इसके साथ ही न्यूनतम जुताई और शून्य जुताई जैसी तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे मिट्टी की नमी सुरक्षित रहती है, ईंधन और श्रम लागत घटती है और खेत की कार्यकुशलता बढ़ती है। कुल मिलाकर, इन सभी उपायों का उद्देश्य रबी खेती को केवल उपज आधारित प्रणाली से आगे ले जाकर एक ऐसी उत्पादन व्यवस्था में बदलना है, जो अधिक टिकाऊ, लचीली और लंबे समय तक लाभकारी साबित हो सके।

यह भी पढ़े: भारत से 2 लाख टन उबले चावल का आयात करेगा बांग्लादेश..!

जागरूक रहिए व नुकसान से बचिए और अन्य लोगों के जागरूकता के लिए साझा करें एवं कृषि जागृति, स्वास्थ्य सामग्री, सरकारी योजनाएं, कृषि तकनीक, व्यवसायिक एवं जैविक खेती से संबंधित जानकारियां प्राप्त करने के लिए जुड़े कृषि जागृति चलो गांव की ओर से या कृषि संबंधित किसी भी समस्या के जैविक समाधान के लिए WhatsApp करें।

Filed Under: कृषि समाचार Tagged With: Agri Market News, Rabi Crops Farming, Rabi Crops Swoing

WhatsApp कृषि जागृति चलो गांव की ओर

Latest Post

इथेनॉल सेक्टर में 2030 तक 45 प्रतिशत बढ़ेगी मांग, क्या भारत बनेगा ग्लोबल बायो-एनर्जी हब..!

इथेनॉल सेक्टर में 2030 तक 45 प्रतिशत बढ़ेगी मांग, क्या भारत बनेगा ग्लोबल बायो-एनर्जी हब..!

वैश्विक चीनी उत्पादन घटने के आसार और इंडोनेशिया के नए नियमों ने बढ़ाई टेंशन..!

वैश्विक चीनी उत्पादन घटने के आसार और इंडोनेशिया के नए नियमों ने बढ़ाई टेंशन..!

बजट में मखाना किसानों को क्या मिला..!

बजट में मखाना किसानों को क्या मिला..!

सरसों की फसल में लगने वाले माहू के प्रकोप को कैसे नियंत्रित करें..!

सरसों की फसल में लगने वाले माहू के प्रकोप को कैसे नियंत्रित करें..!

फरवरी में तापमान बढ़ने की आशंका ने इन रबी फसलों पर बढ़ाया दबाव..!

फरवरी में तापमान बढ़ने की आशंका ने इन रबी फसलों पर बढ़ाया दबाव..!

कृषि जागृति-Krishi Jagriti

कृषि जागृति-Krishi Jagriti का मुख्य उद्देश्य केवल जनोपयोग व जीवन सुधार हेतु स्वास्थ्य सामग्री, कृषि लेख, सरकारी योजनाएं, कृषि तकनीक, व्यवसायिक एवं जैविक खेती संबंधित जानकारियों का प्रसारण करना हैं। इसके अलावा किसी को अपनी जैविक उत्पाद या लेख प्रचार करवानी हैं, तो संपर्क कर सकते हैं। WhatsApp पर।

Follow Us

Recent Posts

  • इथेनॉल सेक्टर में 2030 तक 45 प्रतिशत बढ़ेगी मांग, क्या भारत बनेगा ग्लोबल बायो-एनर्जी हब..!
  • वैश्विक चीनी उत्पादन घटने के आसार और इंडोनेशिया के नए नियमों ने बढ़ाई टेंशन..!
  • बजट में मखाना किसानों को क्या मिला..!
  • सरसों की फसल में लगने वाले माहू के प्रकोप को कैसे नियंत्रित करें..!
  • फरवरी में तापमान बढ़ने की आशंका ने इन रबी फसलों पर बढ़ाया दबाव..!

Search

Leran More

  • About Us
  • Contact Us
  • Privacy Policy
  • Terms And Conditions

Copyright © 2026 कृषि जागृति-Krishi Jagriti All Right Reserved