आलू का बीज सिर्फ एक कंद नहीं, बल्कि आपकी पूरी फसल का आधार है। गलत बीज चुनने से उत्पादन कम हो सकता है और रोग भी लग सकते हैं। उत्तर भारत के कुछ राज्यों में किसान अक्टूबर महीने की शुरुआत में ही आलू की बुवाई का काम शुरू कर देते हैं।
इसकी अच्छी पैदावार के लिए सबसे आवश्यक है बीज का चयन। बीज के चयन में हमें जरा सी गलती हुई तो पूरी फसल खराब हो सकती है। इस आर्टिकल के माध्यम से आप आलू के बीज का चयन एवं बीज उपचारित करने की सही विधि देख सकते हैं।
आलू के बीज का चयन
उच्च गुणवत्ता की बीज के लिए स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि अनुसंधान केंद्र से बीज लें। इसके अलावा आप किसी भी प्रमाणित खाद बीज केंद्र से भी बीज ले सकते हैं।
बुवाई के लिए बीज का चयन करते समय सबसे पहले सड़े-गले कंदो को अलग कर देना चाहिए। बुवाई के लिए पूर्ण रूप से अंकुरित कंदों का ही प्रयोग करना चाहिए।
बुवाई के लिए पूर्ण रूप से अंकुरित कंदों का ही प्रयोग करना चाहिए। कई आंखों वाली अंकुरित कंदों के प्रयोग से अधिक संख्या में बीज आकर के आलू प्राप्त होते हैं।
बीज के तौर पर करीब 40 से 50 ग्राम वजन वाले कंदों की बुवाई करनी चाहिए। बुवाई के लिए संपूर्ण कंदों का प्रयोग करें। संपूर्ण कंद की बुवाई से प्रत्येक कंद से एक ही पौधा निकलेगा।
अगर कंद का आकर बड़ा है तो इसे काट कर प्रयोग कर सकते हैं। कंद को काट कर बुवाई करने से उपज में वृद्धि होगी। लेकिन यदि कोई कंद रोग से संक्रमित है तो आलू को काटने के लिए प्रयोग किए जाने वाले चाकू से अन्य कंद भी रोग से प्रभावित हो सकते हैं। इससे बचने के लिए कंद को काटने के लिए चाकू को अच्छी तरह कीटाणुनाशक के घोल में डूबाने के बाद प्रयोग करें।
आलू के बीज उपचार
बुवाई से पहले प्रति किलोग्राम बीज को 10 मिली जी-बायो फॉस्फेट एडवांस को एक लीटर पानी में मिलाकर उपचारित करें। इसके अलावा प्रति किलोग्राम बीज को 10 मिली जी-डर्मा प्लस ग्राम से भी उपचारित किया जा सकता है। तो किसान भाइयों, सही किस्म का चुनाव, स्वस्थ कंद, और सही उपचार-ये तीन चीज़ें आपको आलू की खेती में सफलता दिलाएँगी।
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