वर्ष 2025 भारतीय इलायची के लिए असाधारण रूप से अनुकूल साबित हुआ है। बेहतर मौसम, साफ़ आपूर्ति शृंखला और मज़बूत निर्यात मांग के मेल ने इस मसाले को फिर से तेज़ी की राह पर ला खड़ा किया है। उत्पादक क्षेत्रों में प्रति किलोग्राम औसत मूल्य प्राप्ति 300 के पार पहुंच चुकी है और कारोबारी हलकों को उम्मीद है कि यह स्तर 400 से 500 तक भी जा सकता है।
केसीपीएमसी लिमिटेड के महाप्रबंधक पी. सी. पुन्नूसे के अनुसार, मार्च से लगातार हुई बारिश ने इलायची बेल्ट में आदर्श जलवायु परिस्थितियां बनाई हैं। इससे बागानों में फूल और दानों का विकास बेहतर रहा और पूरे सीजन उत्पादकता संतोषजनक बनी रही। उन्होंने बताया कि 2023 से 24 में उत्पादन कम रहने के कारण किसानों और उपभोक्ता केंद्रों के पास कैरी-ओवर स्टॉक लगभग शून्य था।
इसका सीधा लाभ यह हुआ कि आपूर्ति शृंखला साफ रही और घरेलू व अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों में निर्बाध बिक्री संभव हुई। विकास बेहतर रहा और पूरे सीजन उत्पादकता संतोषजनक बनी रही। उन्होंने बताया कि 2023 से 24 में उत्पादन कम रहने के कारण किसानों और उपभोक्ता केंद्रों के पास कैरी-ओवर स्टॉक लगभग शून्य था।
इसका सीधा लाभ यह हुआ कि आपूर्ति शृंखला साफ रही और घरेलू व अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों में निर्बाध बिक्री संभव हुई। निर्यात मोर्चे पर भी हालात भारत के पक्ष में रहे। पिछले दो सत्रों में ग्वाटेमाला में फसल को नुकसान पहुंचने से वैश्विक आपूर्ति सख्त हुई, जिससे भारतीय इलायची की मांग और कीमतों को अतिरिक्त सहारा मिला। इन्हीं कारकों के चलते पूरे सीजन में इलायची की औसत कीमत 2,400 रुपए प्रति किलो से ऊपर बनी रही। कटाई के दौरान श्रम संकट के बावजूद दामों में मजबूती बनी रहना इस बाजार की अंतर्निहित ताकत को दर्शाता है। आनेवाले दिनों में कीमतों के रुझानों को लेकर पुन्नूसे ने आशावाद जताया है।
उनका कहना है कि दक्षिण-पश्चिम और उत्तर-पूर्व मानसून के अनुकूल रहने की संभावना है, जिससे उत्पादकता को सहारा मिलेगा। हालांकि, कीमतों की दिशा काफी हद तक ग्वाटेमाला में वास्तविक उत्पादन सुधार पर निर्भर करेगी। यदि भारत और ग्वाटेमाला दोनों में फसल अच्छी रहती है, तो अगले सत्र में कीमतें 1,800 से 2,000 प्रति किलो के दायरे में लौट सकती हैं। फिलहाल, 2025 ने यह साफ कर दिया है कि मौसम, स्टॉक और वैश्विक आपूर्ति का संतुलन भारतीय इलायची के लिए निर्णायक बना हुआ है।
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