केंद्र सरकार पारंपरिक गुड़ उद्योग को संगठित और प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में कई प्रमुख योजनाओं के माध्यम से प्रोत्साहन दे रही है। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के राज्य मंत्री रवनीत सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री कृषि संपदा योजना, प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना और उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन योजना के तहत गुड़ प्रसंस्करण इकाइयों को वित्तीय व तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
मंत्री के अनुसार, इन योजनाओं का लाभ उठाने वाली इकाइयों के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण के मानकों का पालन अनिवार्य किया गया है। साथ ही निर्यात को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वैश्विक गुणवत्ता मानकों को अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।
उन्होंने दी जानकारी के अनुसार, 31 दिसंबर 2025 तक पीएमकेएसवाई के तहत पांच गुड़ प्रसंस्करण इकाइयों को 17.07 करोड़ की अनुदान सहायता स्वीकृत की गई है। वहीं पीएमएफएमई योजना के अंतर्गत गुड़ से जुड़ी 3,528 सूक्ष्म इकाइयों को कुल 102.31 करोड़ की सब्सिडी दी जा चुकी है। इसके अतिरिक्त, पीएमएफएमई के तहत किसान उत्पादक संगठन, स्वयं सहायता समूह और सहकारी समितियां ब्रांडिंग व विपणन के लिए 50 प्रतिशत तक सहायता प्राप्त कर सकती हैं।
19 जिलों में गुड़ को ‘एक जिला एक उत्पाद’ के रूप में चिह्नित किया गया है, जिससे स्थानीय मूल्य शृंखला को सशक्त करने और ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। जब गुड़ की गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय मानकों की होगी, तो निर्यात बढ़ेगा। यानी गन्ने की मिठास अब किसानों की जेब तक सीधे पहुँचेगी। यह कदम भारत को ‘गुड़ का हब’ बनाने की दिशा में एक बड़ी जीत है। क्या आपको लगता है कि इससे आपके क्षेत्र के किसानों की किस्मत बदलेगी।
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