देश में चालू पेराई सत्र के दौरान चीनी उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। भारतीय चीनी एवं जैव-ऊर्जा निर्माता संघ इस्मा के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 31 जनवरी तक देश का कुल चीनी उत्पादन 18.35 प्रतिशत बढ़कर 195.03 लाख टन पर पहुंच गया है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 164.79 लाख टन था।
उत्पादन वृद्धि में महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक की प्रमुख भूमिका रही है। महाराष्ट्र के चीनी उत्पादन में सबसे तेज उछाल देखने को मिला, जहां उत्पादन 42 प्रतिशत बढ़कर 78.72 लाख टन हो गया। गन्ने की बेहतर उपलब्धता, अनुकूल मौसम और मिलों की संख्या में वृद्धि ने इस तेजी को समर्थन दिया। इस सत्र में राज्य में 206 चीनी मिलों में पेराई हो रही हैं, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या 190 थी।
देश के सबसे बड़े उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में चीनी का उत्पादन 55.1 लाख टन रहा, जो पिछले वर्ष के मुकाबले लगभग 5 प्रतिशत बढ़ा है। वहीं कर्नाटक में भी पेराई की रफ्तार मजबूत रही और उत्पादन 15 प्रतिशत बढ़कर 38.1 लाख टन तक पहुंच गया। अन्य राज्यों में उत्पादन स्थिर से लेकर मध्यम वृद्धि के दायरे में रहा है।
फिलहाल राष्ट्रीय स्तर पर 515 चीनी मिलों में पेराई जारी है, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि में संचालित 501 मिलों से अधिक है। बढ़ता उत्पादन घरेलू बाजार में आपूर्ति को मजबूत आधार दे रहा है और उद्योग की नकदी स्थिति पर भी सकारात्मक असर पड़ने की संभावना है।
खास बात यह है कि यह उत्पादन तब है जब भारी मात्रा में चीनी को एथेनॉल बनाने के लिए डायवर्ट किया जा रहा है। ज्यादा उत्पादन का मतलब है- किसानों को समय पर भुगतान और अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की मजबूत पकड़। हालांकि, उद्योग जगत अब सरकार से चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य यानी MSP को बढ़ाने की मांग भी कर रहा है।”
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