जनवरी-फरवरी के दौरान माहू सरसों एवं तोरिया की फसल में सबसे हानिकारक कीटों में से एक है। ठंडी रातें, कोहरा, बादल छाए रहना और नाइट्रोजन उर्वरक का अधिक उपयोग इसके तीव्र प्रसार को बढ़ावा देता है। इसे सही समय पर नियंत्रित नहीं करने पर 30 से 70 प्रतिशत तक उपज हानि, दानों का कमजोर भराव और तेल की मात्रा में कमी हो सकती है।
माहू प्रकोप के प्रमुख लक्षण
कोमल टहनियों, कलियों और फलियों पर छोटे हरे या काले कीटों के झुंड नजर आने लगते हैं। पत्तियों का मुड़ना, पीला पड़ना और कमजोरी पत्तियों पर चिपचिपा स्राव यानी हनीड्यू काली कालिखी फफूंद यानी सूटी मोल्ड का विकास फूल झड़ना और फलियों का कम बनना अधिक प्रकोप में पौधों का सूखना शामिल है।
नियंत्रण के उपाय
नाइट्रोजन उर्वरक का संतुलित मात्रा में प्रयोग करें, और अत्यधिक मात्रा देने से बचें। लेडीबर्ड बीटल, लेसविंग और होवरफ्लाई जैसे प्राकृतिक शत्रुओं को संरक्षित करें। इसलिए रासायनिक कीटनाशक स्प्रे करने से बचें। क्योंकि इन्हें खत्म कर दिए तो आपकी फसल पूरी तरह नष्ट हो जाएगी। ऐसा इसलिए क्योंकि ये कीट महू कीट को अपना भोजन बनाते हैं और आपकी फसल को संरक्षित करने में मदद करते हैं
इस समय सरसों की फसल पर 150 लीटर पानी में एक लीटर जी-बायो फॉस्फेट एडवांस को किसी छायादार स्थान पर मिलाकर संध्या या ठंडे वातावरण में प्रति एकड़ खेत में स्प्रे करें।
छिड़काव करने से संबंधी सावधानियां
प्रारंभिक फूल अवस्था में, माहू दिखते ही सरसों की फसल पर छिड़काव करें। टहनियों, फूलों और फलियों पर दवा का पूरा छिड़काव सुनिश्चित करें। छिड़काव सुबह या शाम के समय करें। मधुमक्खियों की सक्रियता के समय दवा न छिड़कें। लेबल पर दी गई मात्रा और सुरक्षा निर्देशों का पालन करें। कटाई से पूर्व निर्धारित प्रतीक्षा अवधि का पालन करें।
छिड़काव के समय सुरक्षात्मक कपड़े, दस्ताने और मास्क का उपयोग करें। समय पर निगरानी और संतुलित प्रबंधन अपनाकर सरसों में माहू के प्रकोप को प्रभावी रूप से नियंत्रित किया जा सकता है और संभावित उत्पादन हानि से बचा जा सकता है। अगर जरा से भी देरी हुई तो फसल की पैदावार में कमी आएगी।
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