केंद्रीय बजट 2026-27 में उच्च मूल्य कृषि फसलों को बढ़ावा देने की रणनीति के तहत मखाना क्षेत्र के लिए 90 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ‘मखाना विकास हेतु केंद्रीय क्षेत्र योजना’ के अंतर्गत यह राशि आवंटित करते हुए स्पष्ट संकेत दिया है कि केंद्र सरकार इस पारंपरिक लेकिन तेजी से उभरती फसल को संगठित मूल्य श्रृंखला में विकसित करना चाहती है।
गौरतलब है कि सितंबर 2025 में सरकार ने वर्ष 2025-26 से 2030-31 की अवधि के लिए 476.03 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ इस योजना को मंजूरी दी थी। इससे पहले बजट 2025-26 में मखाना बोर्ड के समर्थन के लिए 100 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए थे।
योजना का फोकस अनुसंधान एवं नवाचार, गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन, किसानों के कौशल उन्नयन, वैज्ञानिक कटाई-पश्चात प्रबंधन, मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग और निर्यात संवर्धन पर रहेगा। गुणवत्ता नियंत्रण और संगठित विपणन तंत्र के माध्यम से मखाना को एक प्रीमियम एग्री कमोडिटी के रूप में स्थापित करने की तैयारी है। इसी उद्देश्य से राष्ट्रीय मखाना बोर्ड की स्थापना की गई है, जो उत्पादन से लेकर निर्यात तक पूरी मूल्य शृंखला का समन्वय करेगा।
मखाना मुख्यतः बिहार में लगभग 15,000 हेक्टेयर क्षेत्र में उगाया जाता है। इसे सुखाने और उच्च तापमान पर भूनने के बाद तैयार मखाना घरेलू बाजार के साथ-साथ वैश्विक स्नैक और न्यूट्रास्यूटिकल सेगमेंट में भी मजबूत मांग रखता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अनुसंधान, प्रसंस्करण और निर्यात ढांचे को समानांतर रूप से मजबूत किया गया, तो मखाना क्षेत्र किसानों की आय बढ़ाने के साथ भारत को वैश्विक प्रीमियम फूड मार्केट में मजबूत स्थिति दिला सकता है।
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