बिहार की राजधानी पटना में सार्वजनिक वितरण प्रणाली यानी पीडीएस को तकनीकी रूप से उन्नत और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। केंद्र सरकार की पायलट परियोजना के तहत यहां तीन स्वचालित ‘अन्नपूर्णा’ ग्रेन एटीएम स्थापित किए जाएंगे, जिसे राज्य सरकार ने मंजूरी दे दी है।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत शुरू की जा रही इस पहल का उद्देश्य लाभार्थियों को अनाज वितरण की प्रक्रिया को डिजिटल, सरल और रिसाव-मुक्त बनाना है। इससे पहले अगस्त 2024 में भुवनेश्वर में देश का पहला ग्रेन एटीएम लगाया गया था, और अब उसी मॉडल को पटना में लागू किया जा रहा है।
इन मशीनों के जरिए पात्र लाभार्थी आधार आधारित प्रमाणीकरण के बाद चावल या गेहूं प्राप्त कर सकेंगे। पहचान सत्यापन के पश्चात लाभार्थी आवश्यक मात्रा का चयन करेंगे और मशीन निर्धारित मात्रा में अनाज वितरित करेगी। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन दर्ज होगी, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
तकनीकी दृष्टि से यह प्रणाली काफी दक्ष मानी जा रही है। प्रत्येक मशीन पांच मिनट में 50 किलोग्राम तक अनाज वितरण करने में सक्षम है। कम बिजली खपत के साथ सोलर पैनल और इन्वर्टर से संचालन की व्यवस्था इसे ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के लिए भी उपयुक्त बनाती है।
बिहार में 8.5 करोड़ से अधिक पीडीएस लाभार्थी और 50,000 से ज्यादा राशन दुकानें संचालित हैं। राज्य सरकार का मानना है कि यह डिजिटल मॉडल अनाज की कालाबाजारी और वितरण अनियमितताओं पर प्रभावी अंकुश लगाएगा। उल्लेखनीय है कि पिछले दो वर्षों में 7,955 पीडीएस डीलरों के खिलाफ कार्रवाई की गई है, जिनमें लाइसेंस निरस्तीकरण और प्राथमिकी दर्ज करना शामिल है।
विशेषज्ञों का आकलन है कि यदि पायलट सफल रहता है, तो यह व्यवस्था राज्यभर में विस्तारित की जा सकती है और पीडीएस के व्यापक डिजिटलीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकती है।
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