भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई ने किसान क्रेडिट कार्ड यानी केसीसी योजना को अधिक प्रभावी और समकालीन जरूरतों के अनुरूप बनाने के लिए व्यापक सुधारों का प्रस्ताव रखा है। इन बदलावों का उद्देश्य योजना का दायरा बढ़ाना, ऋण प्रक्रियाओं को सरल करना और कृषि तथा संबद्ध क्षेत्रों की बदलती मांग के अनुरूप वित्तीय सहायता को ढालना है।
मौद्रिक नीति समिति की हालिया बैठक के बाद आरबीआई ने संकेत दिया कि केसीसी योजना की समग्र समीक्षा पूरी कर ली गई है। अब विभिन्न बिखरे हुए निर्देशों को समेकित कर एक एकीकृत और अद्यतन दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे। प्रस्तावित सुधारों के तहत विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों में फसल ऋतुओं का मानकीकरण किया जाएगा, जिससे ऋण आकलन और पुनर्भुगतान चक्र अधिक सुव्यवस्थित हो सके। केसीसी की वैधता अवधि को बढ़ाकर छह वर्ष करने का भी प्रस्ताव है, ताकि किसानों को दीर्घकालिक ऋण स्थिरता मिल सके।
ड्रॉइंग लिमिट को प्रत्येक फसल ऋतु के लिए निर्धारित ‘स्केल ऑफ फाइनेंस’ से जोड़ा जाएगा, जिससे वास्तविक खेती लागत के आधार पर ऋण सीमा तय हो सके। इसके अलावा योजना के दायरे को विस्तारित कर आधुनिक कृषि उपकरणों, मशीनीकरण और एग्री-टेक समाधानों में निवेश को भी शामिल करने की तैयारी है।
आरबीआई जल्द ही इन प्रावधानों को समाहित करते हुए मसौदा दिशानिर्देश जारी करेगा, जिससे केसीसी योजना को अधिक लचीला, पारदर्शी और किसानों की जरूरतों के अनुरूप बनाया जा सके। लेकिन ध्यान रहे! अवधि बढ़ने का मतलब यह कतई नहीं है कि आप ब्याज न भरें। ब्याज में छूट का लाभ तभी मिलता है जब आप हर साल अपना हिसाब-किताब बैंक के साथ क्लियर रखते हैं। अगर इस प्रस्ताव पर अंतिम मुहर लगती है, तो यह छोटे और सीमांत किसानों के लिए एक बड़ी राहत साबित होगी।”
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