फसल बीमा कंपनियां चांदी कूट रही है किसानों के नाम पर पैसे लूट-लूटकर। क्लेम बतौर 50 पैसे मिले है, लेकिन किसानों की यह पीड़ा सरकारों को समझ नहीं आई। अब कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा फसल बीमा कम्पनियों पर सर्जिकल स्ट्राइक कर रहे है तो करोड़ो रूपए का बीमा घोटाला उजागर हो रहा है। वहीं, पूर्ववर्ती सरकार और पंत कृषि भवन के जिम्मेदार अधिकारियों पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
गौरतलब है कि श्रीगंगानगर के बाद कृषि मंत्री डॉ. मीणा ने सालासर-चूरू में एआईसी बीमा कंपनी और एसबीआई बैंक की काली करतूत का पर्दाफाश किया है। हालांकि, कृषि मंत्री के एक्शन के बाद बीमा कंपनी और बैंक प्रबंधक सहित दूसरे कर्मचारियों के खिलाफ पुलिस में मुकदमा दर्ज हो चुका है। बीमा घोटोले को लेकर कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने दावा किया है कि प्रदेश में बड़ी संख्या में ऐसे लोगों का बीमा किया गया, जिनके पास कृषि भूमि ही नहीं है।
करीब 15 हजार फर्जी किसानों के नामों पर बीमा प्रीमियम काटा गया और करीब 1150 करोड़ रुपये का क्लेम भी मंजूर कर दिया गया। उल्लेखनीय है कि यह बीमा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसान क्रेडिट कार्ड यानी केसीसी धारकों का किया गया था। सूत्रों ने बताया कि फसल बीमा के लिए कंपनियों का अनुमोदन भारत सरकार के स्तर पर होता आया है।
फसल बीमा में गड़बड़ी रोकने के उद्देश्य से वर्ष 2016 में पीएम फसल बीमा योजना जरूरी संशोधन के साथ लागू की गई। लेकिन, गड़बडियों का सिलसिला अब भी बदस्तूर जारी है। इस कारण किसानों का रूझान फसल बीमा से कम होता जा रहा है।
दरअसल, मंत्री किरोड़ी लाल मीणा चूरू जिले के सालासर स्थित एसबीआई बैंक शाखा पहुंचे। यहां उन्होंने 71 ऐसे खातों का उल्लेख किया, जिनमें फसल बीमा प्रीमियम काटा गया। जबकि, संबंधित व्यक्तियों के पास भूमि रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। मंत्री ने इस दौरान कहा कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि सूची में शामिल कई नामों का न तो जमाबंदी रिकॉर्ड है और न ही खसरा नंबर दर्ज है। इन पॉलिसियों को एथीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया यानी एआईसी बीमा कंपनी के द्वारा कवर किया गया बताया है।
बताया गया कि इन 71 मामलों में प्रत्येक नाम पर लगभग 12 लाख रुपये तक का भुगतान प्रस्तावित था, जिससे कुल राशि करीब 9 करोड़ रुपये बैठती है। मंत्री का कहना है कि भुगतान प्रायाभी आगे बढ़ चुकी थी। उन्होंने शाखा प्रबंधक से संबंधित दस्तावेज और पूरी बीमा सूची उपलब्ध कराने की मांग की। मंत्री के अनुसार, जब तक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाएंगे, वे मामले को छोडने वाले नहीं हैं।
मंत्री के दावों के बाद अब निगाहें संभावित जांच प्रक्रिया पर टिक गई है। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह मामला फसल बीमा प्रणाली की पारदर्शिता और निगरानी तंत्र पर गंभीर प्रश्न खड़े कर सकता है। फिलहाल, प्रशासनिक स्तर पर जांच और संबंधित एजेंसियों की प्रतिक्रिया का इंतजार है।
मजेदार बात यह है कि कृषि मंत्री द्वारा दिखाई गई सूची में किसानों और उनके पिता के नाम एक ही है। इन व्यक्तियों के पास न तो कोई जमाबंदी है और ना ही कोई खसरा नंबर दर्ज है। सालासर ब्रांच में इन 71 किसानों को 12-12 लाख रुपए यानी कुल 9 करोड़ रुपए मिलने थे, जिसकी प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी थी। किरोड़ी मीणा ने कहा कि मैंने बैंक मैनेजर से फसल बीमा से संबंधित लिस्ट मांगी है। लेकिन, मैनेजर ने कोई लिस्ट नहीं दी।
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की सालासर शाखा के प्रबंधक उमेश कुमार सारस्वत, बैंक कर्मचारी भागीरथ नायक (फसल बीमा पॉलिसी जारीकर्ता) और अन्य अधिकारियों-कर्मचारियों ने एआईसी बीमा कंपनी से मिलीभगत कर फर्जी बीमा पॉलिसियां जारी की।
तहसीलदार गजनेर-बीकानेर के मुताबिक संबंधित किसानों के नाम, सर्वे नंबर, मुरब्बा और खसरा नंबरों का मूल राजस्व रिकॉर्ड से मिलान नहीं हुआ। इसके बावजूद सालासर शाखा द्वारा 71 कथित किसानों के नाम पर फर्जी कृषि भूमि दर्शाकर लगभग 13 लाख 51 हजार रुपय किसानों के प्रीमियम के रूप में जमा करवाए गए।
इसके अतिरिक्त राज्य सरकार और भारत सरकार का अंश मिलाकर लगभग 15 लाख 76 हजार 348 रुपय राजकोष से जमा होना बताया है। इस प्रकार कुल क्लेम राशि लगभग 9 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। सहायक कृषि निदेशक गोविंद सिंह राठौड़ बैंक प्रबंधक उमेश कुमार और भागीरथ सहित अन्य के खिलाफ थाना सालासर में प्राथमिकी दर्ज करवाई है।
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