केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्यसभा में बताया कि फसल अवशेष प्रबंधन (सीआरएम) योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के बाद विशेष रूप से पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं में निरंतर कमी दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों के प्रदूषण में पराली जलाने की हिस्सेदारी लगभग 5 प्रतिशत है, जबकि औद्योगिक उत्सर्जन और वाहनों से होने वाला प्रदूषण भी बड़े कारक हैं।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि पराली जलाना भले ही खेत साफ करने का त्वरित उपाय प्रतीत होता हो, लेकिन इससे मिट्टी की उर्वरता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इससे लाभकारी सूक्ष्मजीव और कीट नष्ट होते हैं तथा मिट्टी के पोषक तत्व और कार्बनिक कार्बन में कमी आती है।
सीआरएम योजना के तहत किसानों को पराली प्रबंधन मशीनों की खरीद पर 50 प्रतिशत सब्सिडी प्रदान की जा रही है, जबकि कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करने वाली संस्थाओं को 80 प्रतिशत तक सहायता दी जाती है। चौहान ने बताया कि अब तक 3.5 लाख से अधिक किसानों को मशीनें उपलब्ध कराई जा चुकी हैं, जिनमें पंजाब के 1.60 लाख, हरियाणा के 1.10 लाख और उत्तर प्रदेश के 76 हजार किसान शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि पंजाब और हरियाणा में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है, जबकि उत्तर प्रदेश में भी पराली जलाने की घटनाओं में लगभग 17 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। सरकार का मानना है कि तकनीकी सहायता और जागरूकता के संयुक्त प्रयासों से आने वाले वर्षों में और सकारात्मक परिणाम मिलेंगे।
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