प्रयागराज के ट्रांस-यमुना क्षेत्र में खेती की तस्वीर तेजी से बदल रही है। शंकरगढ़ और मेजा विकास खंडों के किसान अब पारंपरिक गेहूं, सरसों की खेती तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि संरक्षित खेती के जरिए उच्च मूल्य वाली विदेशी सब्जियों का उत्पादन कर नई राह बना रहे हैं। कभी पथरीली और कम उपजाऊ मानी जाने वाली इस भूमि पर आज पॉलीहाउस और नेटहाउस के भीतर लेट्यूस, ज़ुकीनी, पार्सले, ऐस्पैरागस और ब्रोकोली जैसी फसलें उगाई जा रही हैं, जो न सिर्फ स्थानीय खेती की सोच बदल रही हैं, बल्कि किसानों की आमदनी भी कई गुना बढ़ा रही हैं।
जिला उद्यान विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पारंपरिक फसलों से मिलने वाला सीमित मुनाफा किसानों को लंबे समय से परेशान कर रहा था। लेकिन संरक्षित खेती अपनाने के बाद तस्वीर बदली है। अब किसान लाखों रुपये की सालाना आय अर्जित कर रहे हैं और उत्तर प्रदेश के चुनिंदा रिटेल आउटलेट्स, फाइव-स्टार और फोर-स्टार होटलों को ताज़ी और गुणवत्ता वाली विदेशी सब्जियों की आपूर्ति कर रहे हैं। स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता, शहरी खानपान में बदलाव और विदेशी पर्यटकों की मांग ने इंग्लिश सब्जियों के बाजार को और मजबूत किया है।
इस बदलाव की एक जीवंत मिसाल मेजा ब्लॉक के हरवारी लाखापुर गांव के 48 वर्षीय किसान जिज्ञासु मिश्रा हैं। उद्यान विभाग की मदद से उन्होंने चार पॉलीहाउस और एक नेटहाउस स्थापित किया है, जहां वे होटल और फूड सर्विस उद्योग की जरूरत के मुताबिक विदेशी सब्जियों की खेती कर रहे हैं। जिज्ञासु मिश्रा बताते हैं कि गेहूं और सरसों से उनकी आय वर्षों तक लगभग स्थिर रही, लेकिन लेट्यूस, ज़ुकीनी और पार्सले जैसी सब्जियों ने उनकी खेती की दिशा ही बदल दी। विदेशों में करीब 12 साल तक तेल कंपनियों में काम करने के बाद जब वे प्रयागराज लौटे, तो उन्होंने आधुनिक तकनीक के साथ खेती को अपनाने का फैसला किया।
उन्होंने बताया कि एकीकृत उद्यान विकास मिशन के तहत 50 प्रतिशत सरकारी सब्सिडी से पॉलीहाउस स्थापित करना संभव हुआ। शुरुआत में उन्होंने फूलों की खेती की, लेकिन बाजार की मांग को देखते हुए विदेशी सब्जियों की ओर रुख किया। आज वे प्रयागराज, वाराणसी और लखनऊ के कई प्रीमियम होटलों और चुनिंदा दुकानों को नियमित आपूर्ति कर रहे हैं। उनके अनुभव से यह साफ है कि सही तकनीक, बाजार से सीधा जुड़ाव और सरकारी समर्थन मिलने पर खेती एक लाभकारी उद्यम बन सकती है।
जिला उद्यान अधिकारी सौरभ श्रीवास्तव के अनुसार, उत्तर प्रदेश सरकार संरक्षित खेती को बढ़ावा देकर कृषि नवाचार को मजबूती से आगे बढ़ा रही है। जिज्ञासु मिश्रा जैसे किसानों की सफलता से प्रेरित होकर क्षेत्र के अन्य किसान भी पॉलीहाउस और नेटहाउस तकनीक को अपना रहे हैं, जिससे न सिर्फ उनकी आय बढ़ रही है, बल्कि खेती अधिक टिकाऊ और बाजारोन्मुख बन रही है।
अधिकारियों का कहना है कि बदलती जीवनशैली, मधुमेह, मोटापा और हृदय रोग जैसी समस्याओं के बढ़ते मामलों के बीच उपभोक्ता अब डाइट-फ्रेंडली और पोषणयुक्त विकल्प तलाश रहे हैं। सलाद, सूप, पास्ता और स्टर-फ्राई जैसे व्यंजनों की बढ़ती लोकप्रियता ने विदेशी सब्जियों को आधुनिक भारतीय आहार का अहम हिस्सा बना दिया है। इसी मांग ने प्रयागराज के ट्रांस-यमुना क्षेत्र के किसानों के लिए आय बढ़ाने का एक नया और टिकाऊ रास्ता खोल दिया है।
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