राष्ट्रीय सहकारी चीनी मिल संघ लिमिटेड के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 के चालू चीनी सीजन में देश का चीनी उत्पादन सालाना आधार पर तेज़ी से बढ़ा है। यह उछाल मुख्य रूप से गन्ने की अधिक पेराई और अपेक्षाकृत बेहतर रिकवरी दरों के कारण दर्ज किया गया है। देश में 31 दिसंबर 2025 तक कुल 118.30 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि के 95.60 लाख के मुकाबले करीब 24 प्रतिशत ज्यादा है।
गन्ने की पेराई के मोर्चे पर भी उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई है। चालू सीजन में अब तक 1,339.21 लाख टन गन्ने की पेराई हो चुकी है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 1,101.87 लाख टन गन्ने की पेराई हुई थी। इस बार मिलों की पेराई गतिविधि कहीं अधिक रही है, भले ही परिचालन में शामिल मिलों की संख्या लगभग स्थिर बनी हुई हो। औसत चीनी रिकवरी दर भी हल्के सुधार के साथ 8.83 प्रतिशत दर्ज की गई, जो पिछले वर्ष की 8.68 प्रतिशत रिकवरी से अधिक है। फिलहाल देशभर में 499 चीनी मिलों का पेराई सीजन शुरू हैं, जबकि पिछले सीजन में 500 मिलों का पेराई सीजन शुरू था।
महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक अब तक के कुल राष्ट्रीय चीनी उत्पादन का लगभग 90 प्रतिशत योगदान दे रहे हैं। बेहतर गन्ना उपलब्धता और अधिक पेराई के चलते महाराष्ट्र इस सीजन का सबसे बड़ा लाभार्थी बनकर उभरा है। उत्तर प्रदेश ने अपेक्षाकृत स्थिर उत्पादन बनाए रखा है, जबकि कर्नाटक ने भी कुल वृद्धि में अहम भूमिका निभाई है।
इसके अलावा गुजरात, पंजाब और उत्तराखंड जैसे राज्यों का निरंतर योगदान, बिहार और तमिलनाडु जैसे कुछ राज्यों में आई गिरावट की भरपाई करने में सहायक रहा है। उद्योग से जुड़े जानकारों का मानना है कि यदि मौसम अनुकूल रहा और पेराई की गति बनी रही, तो चालू सीजन में चीनी उत्पादन का रुझान आगे भी मजबूत बना रह सकता है।
चीनी उत्पादन में यह 24 प्रतिशत की उछाल न केवल कृषि क्षेत्र के लिए एक मील का पत्थर है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में एक बड़ा कदम है। गन्ने की यह मिठास अब किसानों की जेब और देश की जीडीपी, दोनों में नजर आने वाली है।
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