चालू फसल वर्ष 2025-26 में न्यूनतम समर्थन मूल्य के तहत सरकार द्वारा उड़द की खरीद 50,000 टन के स्तर को पार कर चुकी है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि खरीद बंद होने से पहले अतिरिक्त 50,000 टन उड़द जुटाने का लक्ष्य रखा गया है, हालांकि घरेलू उत्पादन में कमजोरी के चलते आगे खरीद की रफ्तार सीमित रह सकती है।
एक अधिकारी के अनुसार, उत्पादन अनुमान कमजोर बने रहने से सरकारी खरीद में बड़ी बढ़ोतरी की गुंजाइश कम है। मौजूदा नियमों के तहत उपभोक्ता कार्य मंत्रालय को करीब 4 लाख टन उड़द का बफर स्टॉक बनाए रखना होता है। लेकिन हाल के वर्षों में उड़द उत्पादन में लगातार गिरावट देखी गई है, जिससे आयात पर निर्भरता बढ़ती जा रही है।
आंकड़ों के मुताबिक, उड़द का उत्पादन पिछले साल के 23 लाख टन से घटकर 22 लाख टन तक सिमटने का अनुमान है। मौजूदा सीजन की तस्वीर भी कमजोर बनी हुई है। रबी उड़द का रकबा सालाना आधार पर 6 प्रतिशत घटकर 4.58 लाख हेक्टेयर रह गया है। अधिकारियों का अनुमान है कि खरीफ और रबी दोनों मिलाकर 2025-26 में कुल उत्पादन लगभग 22 लाख टन ही रहेगा, जो पिछले वर्ष के आसपास है।
घरेलू आपूर्ति को स्थिर रखने के लिए सरकार ने म्यांमार के साथ उड़द आयात का समझौता अगले पांच वर्षों के लिए बढ़ा दिया है, जिसके तहत हर साल 2.5 लाख टन उड़द शुल्क-मुक्त आयात किया जा सकेगा। इसके बावजूद आयात ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। 2024-25 में भारत ने म्यांमार से 7 लाख टन से अधिक उड़द आयात किया, जो कुल 8.2 लाख टन आयात का लगभग 87 प्रतिशत है।
अधिकारियों का कहना है कि घरेलू उत्पादन और आयात के सहारे फिलहाल उपलब्धता संतोषजनक बनी हुई है। म्यांमार और ब्राजील आगे भी उड़द के प्रमुख आपूर्तिकर्ता बने रहेंगे, जिससे निकट अवधि में बाजार पर आपूर्ति दबाव सीमित रहने की उम्मीद है।
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